रक्खड़ पुण्या पर कांग्रेस की बैठक में सियासी घमासान, चन्नी समर्थकों ने किया शक्ति प्रदर्शन

पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। बाबा बकाला साहिब में रक्खड़ पुण्या के अवसर पर आयोजित कांग्रेस की राजनीतिक कॉन्फ्रेंस में पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन में जमकर नारेबाजी हुई। कांग्रेस की इस कॉन्फ्रेंस में चन्नी समर्थकों ने उन्हें पंजाब में पार्टी का अगला मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने की मांग उठाई। बड़ी संख्या में पहुंचे समर्थकों ने चन्नी के पक्ष में नारे लगाए, जिससे पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी एक बार फिर चर्चा में आ गई। बाबा बकाला में हुई यह कांग्रेस की तीसरी राजनीतिक कॉन्फ्रेंस थी। कार्यक्रम के दौरान मंच और आसपास के इलाके में चन्नी समर्थकों की मौजूदगी और उनकी नारेबाजी साफ तौर पर दिखाई दी। कार्यक्रम के मंच पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ चरणजीत सिंह चन्नी की तस्वीरों को भी प्रमुखता से लगाया गया था। इस दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, पूर्व मंत्री त्रिपत राजिंदर सिंह बाजवा और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी रही। हालांकि, चन्नी के समर्थन में हुई नारेबाजी ने कार्यक्रम का राजनीतिक फोकस अपनी ओर खींच लिया। खडूर साहिब से पूर्व विधायक रमनजीत सिंह सिक्की इस दौरान भावुक नजर आए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए चन्नी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने की खुलकर पैरवी की। सिक्की ने कथित तौर पर यह तक कहा कि यदि पार्टी चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर आगे करती है तो वह चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने अपनी राजनीतिक भूमिका को भी चन्नी के नेतृत्व से जोड़ते हुए कड़ा रुख जाहिर किया। बाबा बकाला में हुई नारेबाजी को लुधियाना के बाद चन्नी समर्थकों की ओर से नेतृत्व को लेकर उठाई जा रही मांग की अगली कड़ी माना जा रहा है। इससे पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रही बहस और तेज हो गई है। चरणजीत सिंह चन्नी ने भी सम्मेलन के दौरान आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकर के कामकाज और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।
चन्नी ने आरोप लगाया कि खुद को क्रांतिकारी कहने वाली सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हुई है। उन्होंने दावा किया कि सरकार के चार साल के कार्यकाल में पंजाब में गैंगस्टरों का प्रभाव बढ़ा है। उन्होंने कहा कि पंजाब में बदलाव के बजाय गैंगस्टरों का राज दिखाई दे रहा है। हालांकि, ये चन्नी द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं और सरकार की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया आने पर तस्वीर और स्पष्ट होगी। इसी बीच पंजाब कांग्रेस के भीतर चन्नी गुट और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच मतभेद भी लगातार चर्चा में हैं। चन्नी समर्थकों की ओर से कई बार वड़िंग के नेतृत्व पर सवाल उठाए जा चुके हैं। चन्नी गुट के कुछ नेताओं की ओर से राजा वड़िंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाने की मांग भी सामने आती रही है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बनाए रखने का फैसला किया है। दिल्ली में हुई पार्टी की बैठक के बाद वड़िंग के पद पर बने रहने से चन्नी गुट की नाराजगी की चर्चाओं को और हवा मिली। इसके बाद पंजाब में पार्टी के कार्यक्रमों के दौरान दोनों खेमों के बीच दूरी को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
पंजाब दौरे के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल की गतिविधियों को लेकर भी पार्टी के भीतर अलग-अलग चर्चाएं रहीं। चन्नी गुट की ओर से पार्टी के कुछ कार्यक्रमों में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाए जाने की बात भी सामने आती रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पंजाब कांग्रेस के लिए अंदरूनी एकजुटता बड़ी चुनौती बनती जा रही है। एक तरफ पार्टी को आम आदमी पार्टी, अकाली दल और भाजपा जैसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों का सामना करना है, वहीं दूसरी तरफ नेतृत्व और मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर पार्टी के भीतर ही मतभेद सामने आ रहे हैं। चन्नी समर्थकों की ओर से मुख्यमंत्री चेहरे की मांग ऐसे समय में उठ रही है, जब विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं। ऐसे में पार्टी हाईकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग गुटों को साथ लेकर चलने और चुनाव से पहले संगठन में एकजुटता बनाए रखने की होगी। बाबा बकाला की कॉन्फ्रेंस में जिस तरह चन्नी के समर्थन में नारे लगे, उससे यह संकेत जरूर मिला है कि 2027 के चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर बहस और तेज हो सकती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस हाईकमान चन्नी समर्थकों की इस मांग पर क्या रुख अपनाता है और प्रदेश संगठन में चल रही अंदरूनी खींचतान को किस तरह संभालता है। फिलहाल बाबा बकाला की कॉन्फ्रेंस ने पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।



