पंजाब के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग स्टाफ की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, ग्रेड पे बहाली की मांग पर अड़े कर्मचारी

पंजाब के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ ने ₹4,600 ग्रेड पे की बहाली की मांग को लेकर बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। राज्य सरकार द्वारा एक दिन पहले आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) लागू किए जाने के बावजूद नर्सिंग कर्मचारियों ने अपना आंदोलन जारी रखा।
हड़ताल का असर पटियाला, अमृतसर और मोहाली के सरकारी मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों में देखने को मिला। सामान्य वार्डों और ओपीडी सेवाओं में नर्सिंग स्टाफ की अनुपस्थिति के कारण मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, नर्सिंग यूनियनों का कहना है कि आपातकालीन सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया गया है और गंभीर मरीजों की देखभाल के लिए सीमित संख्या में स्टाफ तैनात किया गया है।
यूनाइटेड नर्सेज एसोसिएशन (UNA) के बैनर तले बड़ी संख्या में नर्सिंग कर्मचारी अस्पतालों के मुख्य द्वारों पर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की।
नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से ₹4,600 ग्रेड पे बहाल करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। उनका आरोप है कि कई बार मांग उठाने और बातचीत के बावजूद समाधान नहीं निकला, जिसके चलते उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
शहीद भगत सिंह नर्सिंग यूनियन, पटियाला की अध्यक्ष आरती बाली ने कहा कि हड़ताल की घोषणा काफी पहले कर दी गई थी और सरकार को इसकी पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद कर्मचारियों की मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि जब तक ग्रेड पे बहाल नहीं किया जाता और सरकार लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
दूसरी ओर, पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित होने से रोकने के लिए ESMA लागू किया है। सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाएं आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में आती हैं और मरीजों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और अस्पतालों में वैकल्पिक व्यवस्थाएं करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस बीच मरीजों और उनके परिजनों ने सरकार और नर्सिंग कर्मचारियों से जल्द समाधान निकालने की अपील की है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह सामान्य हो सकें और लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
फिलहाल, सरकार और नर्सिंग संगठनों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच बातचीत होती है या आंदोलन और तेज होता है।


