चंद्रशेखर आजाद पर हमले के बाद सियासत तेज, रोहिणी घावरी के बयान से बढ़ा विवाद; भीम आर्मी का प्रदर्शन

लखनऊ:- आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पर बाराबंकी में हुए हमले के बाद मामला लगातार गरमाता जा रहा है। चंद्रशेखर आजाद ने हमले को बड़ी साजिश बताते हुए अपनी हत्या की आशंका जताई है और पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, इस मामले में रोहिणी घावरी के बयानों और करणी सेना की सक्रियता ने विवाद को और बढ़ा दिया है। चंद्रशेखर आजाद ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दावा किया कि एक फार्म हाउस में उनकी हत्या की साजिश रची गई थी। उन्होंने कहा कि उनके पास इस संबंध में कुछ सूचनाएं और स्रोत हैं, जिन्हें वह गंभीरता से ले रहे हैं। सांसद ने सरकार से मांग की कि बाराबंकी में हुई घटना के साथ-साथ कथित हत्या की साजिश की भी जांच कराई जाए।
चंद्रशेखर आजाद ने जताई हत्या की साजिश की आशंका
नगीना सांसद ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह यह बात पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहे हैं कि उनकी हत्या की साजिश रची गई है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और बाराबंकी की घटना में शामिल लोगों की भूमिका सामने लाने की मांग की। आजाद ने अपने विरोधियों को संबोधित करते हुए कहा कि मौत से डरकर जिंदगी नहीं जी जा सकती। उन्होंने अपने समर्थकों से भी डरने के बजाय संघर्ष जारी रखने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि मामला सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा तक सीमित नहीं है। सांसद के मुताबिक, अगर सुरक्षा प्राप्त किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि पर दिनदहाड़े पत्थरबाजी हो और कथित तौर पर ज्वलनशील पदार्थ से भरी बोतलों के जरिए वाहन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जाए, तो यह कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुलिस अधिकारियों से संपर्क का भी किया जिक्र
चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया कि घटना के दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने कहा कि कई अधिकारी उस समय की स्थिति से परिचित थे।
सांसद ने दावा किया कि उन्होंने अधिकारियों को घटना की गंभीरता और अपने साथ मौजूद लोगों के साथ हुई स्थिति के बारे में बताया, लेकिन इसके बावजूद तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की। आजाद ने कहा कि कानून-व्यवस्था के मुद्दे को लेकर उनके संगठन के कार्यकर्ता जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे।
रोहिणी घावरी के बयानों से भी बढ़ा विवाद
इस पूरे घटनाक्रम के बीच रोहिणी घावरी के बयानों ने भी राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रशेखर आजाद और रोहिणी घावरी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। रोहिणी ने कथित तौर पर चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ तीखे बयान दिए हैं। वहीं, करणी सेना की ओर से भी रोहिणी के समर्थन में कार्रवाई की बात कही गई है। इस घटनाक्रम के बाद मामला सिर्फ बाराबंकी में हुए हमले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। रोहिणी के बयानों में चंद्रशेखर आजाद को लेकर बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, इन बयानों और आरोपों के संबंध में संबंधित पक्षों के दावों को उनके बयानों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बलरामपुर में भीम आर्मी का प्रदर्शन
चंद्रशेखर आजाद पर हमले के विरोध में बलरामपुर में भी भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष लालजी लहरी के नेतृत्व में कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने चंद्रशेखर आजाद पर हुए हमले के साथ अयोध्या में राम लगन मौर्य की हत्या के मामले का भी विरोध किया। संगठन ने दोनों घटनाओं की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
भीम आर्मी के मंडल प्रभारी मोहम्मद आबिद ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग जिलों में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े लोगों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं।
सीबीआई जांच की मांग
बलरामपुर में प्रदर्शन कर रहे भीम आर्मी कार्यकर्ताओं ने दोनों मामलों की सीबीआई जांच कराने की मांग की। संगठन का कहना है कि घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो। फिलहाल, चंद्रशेखर आजाद पर बाराबंकी में हुए हमले के बाद उनके द्वारा लगाए गए साजिश के आरोप और संगठन की ओर से किए जा रहे विरोध-प्रदर्शन ने उत्तर प्रदेश की सियासत में इस मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। मामले में पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई से तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।



