स्टेट रैंकिंग में नंबर-1 से चार गोल्ड तक, 12 साल की कायरा ने दिखाया शानदार खेल

देहरादून:- उत्तराखंड की उभरती टेबल टेनिस खिलाड़ी कायरा भंडारी ने महज 12 साल की उम्र में अपने शानदार प्रदर्शन से बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पौड़ी गढ़वाल के शहीद राइफलमैन जसवंत सिंह महावीर चक्र स्टेडियम में आयोजित 2nd उत्तराखंड स्टेट रैंकिंग टेबल टेनिस टूर्नामेंट में कायरा ने चार अलग-अलग वर्गों की सिंगल्स स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर क्लीन स्वीप किया। कायरा ने अंडर-15, अंडर-17, अंडर-19 और सीनियर महिला वर्ग में खिताब अपने नाम किए। खास बात यह रही कि उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में अपना दबदबा बनाए रखा और चारों वर्गों के फाइनल मुकाबले जीतकर अजेय रहते हुए चार गोल्ड मेडल हासिल किए।
12 साल की उम्र में चार वर्गों में चैंपियन
कायरा की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने अपनी उम्र से बड़े खिलाड़ियों के बीच खेलते हुए लगातार बेहतर प्रदर्शन किया। अंडर-15 से लेकर अंडर-19 तक के वर्गों में चुनौती पेश करने के बाद उन्होंने सीनियर महिला वर्ग में भी अपनी क्षमता साबित की। सीनियर महिला वर्ग का खिताब कायरा के लिए विशेष रहा, क्योंकि यह इस वर्ग में उनका पहला खिताब है। एक ही प्रतियोगिता में चार अलग-अलग वर्गों में स्वर्ण पदक जीतना उनके खेल में निरंतरता और अलग-अलग स्तर के खिलाड़ियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता को दर्शाता है।
आक्रामक खेल शैली बनी कायरा की पहचान
दाएं हाथ से खेलने वाली कायरा की खेल शैली आक्रामक है। तेज शॉट्स, रफ्तार और लगातार प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बनाए रखना उनके खेल की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। यही वजह है कि कम उम्र के बावजूद वह अपनी आयु से बड़े वर्गों में भी लगातार प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। अंडर-15, अंडर-17, अंडर-19 और महिला वर्ग में खेलने से कायरा को अलग-अलग स्तर के खिलाड़ियों के खिलाफ अनुभव मिल रहा है। खासकर सीनियर खिलाड़ियों के साथ मुकाबले उन्हें अपनी तकनीक, गति और रणनीति को और बेहतर करने का अवसर दे रहे हैं।
कोविड काल में शुरू हुआ था टेबल टेनिस का सफर
कायरा का टेबल टेनिस से जुड़ाव वर्ष 2021 में कोविड काल के दौरान शुरू हुआ। शुरुआत में खेल को सामान्य तौर पर सीखने के बाद धीरे-धीरे उनकी इसमें रुचि बढ़ती गई। लगातार अभ्यास और खेल के प्रति गंभीरता के चलते वर्ष 2023 से उन्होंने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में नियमित रूप से हिस्सा लेना शुरू किया। इसके बाद कायरा ने अलग-अलग आयु वर्गों में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया और अपनी रैंकिंग में भी तेजी से सुधार किया।
अंडर-13 में भारत की नंबर-34 रैंकिंग तक पहुंचीं
कायरा राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। कम उम्र में राष्ट्रीय रैंकिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हुए उन्होंने अंडर-13 वर्ग में भारत की नंबर-34 रैंकिंग तक का सफर तय किया। इसके साथ ही वह अंडर-15, अंडर-17 और अंडर-19 जैसे बड़े आयु वर्गों में भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रही हैं। अपनी उम्र से बड़े खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने का अनुभव उनके खेल को लगातार परिपक्व कर रहा है।
2026 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया डेब्यू
कायरा के करियर में वर्ष 2026 एक महत्वपूर्ण पड़ाव लेकर आया। इसी साल उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम रखा। उन्होंने ताशकंद, उज्बेकिस्तान और अल्माटी, कजाकिस्तान में आयोजित WTT Youth Contender प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। इन प्रतियोगिताओं में कायरा को भारत के अलावा कई देशों के युवा खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने का मौका मिला। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली प्रतिस्पर्धा ने उन्हें अलग-अलग खेल शैलियों और मजबूत खिलाड़ियों के खिलाफ अपनी क्षमता परखने का अनुभव दिया।
देहरादून और टिहरी से जुड़ी हैं कायरा की जड़ें
कायरा का पारिवारिक जुड़ाव भी उत्तराखंड से गहरा है। उनका मूल घर देहरादून में है, जबकि उनके पिता का परिवार टिहरी गढ़वाल के कीर्तिनगर क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ते हुए कायरा अपने प्रदेश और पारिवारिक जड़ों से जुड़ी हुई हैं। उनकी कम उम्र में हासिल की गई उपलब्धियां उत्तराखंड के अन्य युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बन सकती हैं।
पौड़ी में चार गोल्ड जीतना क्यों है खास?
पौड़ी में आयोजित स्टेट रैंकिंग प्रतियोगिता में चार स्वर्ण पदक जीतना कायरा के अब तक के खेल सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हो गया है। एक ही टूर्नामेंट में अंडर-15, अंडर-17, अंडर-19 और महिला वर्ग के खिताब जीतना उनकी निरंतरता को दिखाता है। खास तौर पर सीनियर महिला वर्ग में पहली बार चैंपियन बनना इस उपलब्धि को और महत्वपूर्ण बनाता है। अलग-अलग आयु वर्गों में खेलने के बावजूद कायरा ने हर वर्ग में खुद को साबित किया।
एक साल में रैंकिंग में भी बड़ी छलांग
कायरा ने पिछले एक साल के दौरान अपनी स्टेट रैंकिंग में भी उल्लेखनीय सुधार किया है। वर्ष 2025 में वह अंडर-13 में दूसरे, अंडर-15 में पहले, अंडर-17 में तीसरे, अंडर-19 में पहले और महिला वर्ग में दूसरे स्थान पर थीं। वर्ष 2026 में उन्होंने इन सभी वर्गों में नंबर-1 रैंकिंग हासिल कर ली। यह बदलाव उनके लगातार प्रदर्शन और प्रतियोगिताओं में बेहतर नतीजों को दर्शाता है।
कायरा बोलीं- कोच की मेहनत का नतीजा हैं ये सफलताएं
चार स्वर्ण पदक जीतने के बाद कायरा भंडारी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच पराग अग्रवाल की मेहनत को दिया। उन्होंने कहा कि वह लगातार अपने खेल पर फोकस कर रही हैं और आगे के लिए उन्होंने कुछ लक्ष्य तय किए हैं।
कायरा भंडारी ने कहा:
“ये सारी सफलताएं मेरे कोच पराग अग्रवाल की मेरे साथ की गई मेहनत का नतीजा हैं। मैं लगातार अपने खेल पर फोकस कर रही हूं। आगे के लिए मैंने कुछ गोल निर्धारित किए हैं और उन्हें हासिल करने का प्रयास करूंगी।”
कोच पराग अग्रवाल बोले- कायरा के लिए आगे भी बड़ी तैयारी
कायरा को प्रशिक्षण देने वाले पराग अग्रवाल भारतीय टेबल टेनिस टीम के कोच भी हैं। वह लखनऊ स्थित अकादमी में कायरा को ट्रेनिंग देते हैं। कायरा का अधिकांश समय टेबल टेनिस के अभ्यास में बीतता है और उनकी मां भी उनके प्रशिक्षण के लिए देहरादून से लखनऊ जाकर उनके साथ रहती हैं। पराग अग्रवाल के मुताबिक, पौड़ी में कायरा का चार स्वर्ण पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि टीम का लक्ष्य इस प्रतियोगिता में उत्तराखंड की सभी संबंधित टीमों में शीर्ष प्रदर्शन करना था और कायरा ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि कायरा ने उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अपनी क्षमता दिखाई है। फिलहाल उनका ध्यान कायरा की तकनीक और प्रदर्शन को लगातार बेहतर करने पर है।
अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर नजर
कायरा का खेल सफर अब जिला और राज्य स्तर से आगे बढ़कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंच चुका है। महज 12 साल की उम्र में अलग-अलग आयु वर्गों में लगातार खिताब जीतना और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव हासिल करना उनके करियर की दिशा को दर्शाता है। पौड़ी में चार स्वर्ण पदकों की यह उपलब्धि कायरा के बढ़ते खेल करियर में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब उनका लक्ष्य आने वाली राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपने प्रदर्शन को और मजबूत करना है।



