पंजाब

जालंधर नगर निगम हाउस में सियासी घमासान, BJP-कांग्रेस पार्षदों का जोरदार प्रदर्शन

जालंधर नगर निगम हाउस की बैठक में वार्डों में विकास कार्यों को लेकर जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस पार्षद अपने-अपने वार्डों में काम नहीं होने और विकास कार्यों में आ रही दिक्कतों को लेकर अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने बीच में बोलना शुरू कर दिया, जिसके बाद सदन में माहौल गर्म हो गया और पार्षदों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। हंगामे के बीच मेयर वनीत धीर ने नगर निगम हाउस की बैठक में रखे गए सभी प्रस्तावों को बेहद कम समय में पास कर दिया। विपक्षी पार्षदों का आरोप है कि जब सदन में पार्षद अपनी समस्याएं और सवाल रख रहे थे, उसी दौरान बिना पर्याप्त चर्चा और जवाब दिए प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई। मेयर की ओर से प्रस्ताव पास किए जाने के बाद भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों ने इसका विरोध किया। विरोध जताते हुए पार्षदों ने बैठक की कॉपियां हवा में उछालीं और सदन में अपना आक्रोश जाहिर किया। विपक्षी पार्षदों का कहना था कि उनकी ओर से उठाए जा रहे सवालों को सुना नहीं गया और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया।

विपक्षी पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर निगम हाउस की बैठक में लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन हंगामे के बीच प्रस्तावों को जल्दबाजी में पास कर दिया गया। उनका कहना था कि वार्डों में विकास कार्यों से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब उन्हें नहीं मिले और बैठक में उनकी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा नहीं हो सकी। कांग्रेस पार्षदों का कहना था कि कई वार्डों में विकास कार्य लंबे समय से प्रभावित हैं। सड़क, सफाई, सीवरेज और अन्य स्थानीय समस्याओं को लेकर पार्षद लगातार नगर निगम अधिकारियों और हाउस में मुद्दे उठा रहे हैं। बैठक में भी इन्हीं समस्याओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे, लेकिन आप पार्षदों के बीच हस्तक्षेप के बाद चर्चा हंगामे में बदल गई। वहीं, भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों ने मेयर पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि सदन में विपक्षी पार्षदों को सवाल पूछने और अपनी समस्याएं रखने का अधिकार है। यदि प्रस्तावों पर चर्चा और पार्षदों के सवालों के जवाब दिए बिना ही उन्हें पास किया जाएगा तो इससे हाउस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होंगे।

विपक्षी पार्षदों ने यह भी आरोप लगाया कि मेयर बिना उनके सवालों का जवाब दिए बैठक से चले गए। उनका कहना है कि कई पार्षद अपनी समस्याएं सदन के सामने रखना चाहते थे, लेकिन हंगामे और जल्दबाजी में बैठक की कार्यवाही आगे बढ़ा दी गई। इसके कारण कई पार्षद अपनी बात पूरी तरह नहीं रख पाए। नगर निगम हाउस की बैठक में हुए इस घटनाक्रम ने एक बार फिर जालंधर की स्थानीय राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते मतभेद को सामने ला दिया है। विकास कार्यों और वार्डों की समस्याओं को लेकर पहले से ही पार्षदों के बीच मतभेद हैं और अब हाउस की कार्यवाही को लेकर भी दोनों पक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं। फिलहाल बैठक में हुए हंगामे को लेकर भाजपा और कांग्रेस पार्षदों ने मेयर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि नगर निगम हाउस में जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त समय देकर जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर निगम की आगामी बैठकों में भी राजनीतिक टकराव बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं।

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