उत्तर प्रदेश

राम मंदिर ट्रस्ट पर नए आरोप, पूर्व इंजीनियर ने उठाए गंभीर सवाल


अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर समय-समय पर उठने वाले विवादों के बीच अब एक नया मामला सामने आया है। राम मंदिर निर्माण कार्यों की निगरानी से जुड़े रहे सेवानिवृत्त इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने सोशल मीडिया पर प्रसारित एक इंटरव्यू में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके आरोप सामने आने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। इससे पहले भी मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों को लेकर सवाल उठाए जा चुके हैं, जिसके चलते यह नया विवाद और अधिक सुर्खियों में आ गया है।

दीनानाथ वर्मा ने इंटरव्यू के दौरान दावा किया कि राम मंदिर परिसर में ट्रस्ट कार्यालय के निर्माण कार्य से जुड़े एल्युमिनियम वर्क के एक ठेकेदार से कथित तौर पर 40 प्रतिशत कमीशन की मांग की गई थी। उनका आरोप है कि इसी उद्देश्य से संबंधित कार्य का बिल भी लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ाकर तैयार कराया गया था। वर्मा का कहना है कि जब उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी हुई तो उन्होंने इसका विरोध किया और इस पर आपत्ति भी दर्ज कराई।

पूर्व इंजीनियर ने दावा किया कि उन्होंने इस कथित मामले की जानकारी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को भी दी थी। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कथित बातचीत से जुड़ी कॉल रिकॉर्डिंग भी सुनाई थी, ताकि मामले की गंभीरता को समझा जा सके। वर्मा का आरोप है कि शिकायत करने और आपत्ति जताने के बाद उन्हें ही संबंधित कार्यों से अलग कर दिया गया। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई दस्तावेज या रिकॉर्डिंग जारी नहीं की है।

इंटरव्यू के दौरान दीनानाथ वर्मा ने उस समय निर्माण कार्य से जुड़े एक कर्मी रवि गुप्ता का भी उल्लेख किया। लेकिन आरोप सार्वजनिक होने के कुछ समय बाद ही रवि गुप्ता सोशल मीडिया पर लाइव आए और उन्होंने वर्मा के दावों का खुलकर खंडन किया। रवि गुप्ता ने कहा कि डॉ. अनिल मिश्र पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार, भ्रामक और तथ्यों से परे हैं।

रवि गुप्ता ने अपनी सफाई में कहा कि राम कचहरी मंदिर परिसर में ट्रस्ट कार्यालय के निर्माण कार्य के लिए उनसे कोटेशन मांगा गया था। उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना कोटेशन जमा किया, लेकिन कुछ दिनों तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि दीनानाथ वर्मा किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से यह कार्य करवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि संबंधित कार्य बीच में ही रुक गया था, जिसके बाद उन्हें दोबारा बुलाया गया। इसके बाद उन्होंने पुनः नाप-जोख की और नया कोटेशन प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर कार्य पूरा कराया गया।

रवि गुप्ता ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने स्वयं यह पूरा कार्य किया है और कार्य के दौरान कभी भी किसी प्रकार की कमीशन मांगने या देने जैसी कोई बात उनके सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि यदि दीनानाथ वर्मा के पास अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य या रिकॉर्डिंग है तो उन्हें सार्वजनिक मंच पर सामने आकर प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह किसी भी चर्चा या तथ्यात्मक जांच के लिए तैयार हैं और आरोपों का पूरी तरह खंडन करते हैं।

फिलहाल यह मामला आरोप और प्रत्यारोप तक ही सीमित है। एक ओर जहां पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर संबंधित व्यक्ति रवि गुप्ता ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। मामले में अब तक किसी जांच एजेंसी या ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में आरोपों की सत्यता और वास्तविक स्थिति का पता किसी निष्पक्ष जांच या आधिकारिक पड़ताल के बाद ही चल सकेगा। जब तक कोई प्रमाणित जांच रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक इस पूरे प्रकरण को आरोप और जवाबी दावों के रूप में ही देखा जा रहा है।




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