उत्तराखंड

उत्तरकाशी के धराली में आपदा के एक साल बाद क्या बदला? जानें राहत और पुनर्निर्माण की कहानी

उत्तरकाशी: उत्तरकाशी जिले के धराली कस्बे में 5 अगस्त 2025 को आई विनाशकारी आपदा को आज एक वर्ष पूरा हो गया है। खीरगंगा की ओर से अचानक आए मलबे और तेज बहाव ने कुछ ही मिनटों में धराली की तस्वीर बदल दी थी। कई घर तबाह हो गए, लोगों की आजीविका छिन गई और अनेक परिवारों को अपनों के बिछड़ने का दर्द झेलना पड़ा। लेकिन एक साल बाद धराली की तस्वीर में बड़ा बदलाव नजर आता है। आपदा की भयावह यादों के बीच स्थानीय लोगों ने हिम्मत नहीं हारी। प्रशासन, सरकार, सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों के सामूहिक प्रयासों से पुनर्वास और पुनर्निर्माण का काम आगे बढ़ा और धराली धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट आया।

5 अगस्त 2025 को आई थी भीषण आपदा

धराली में 5 अगस्त 2025 को दोपहर करीब 1:50 बजे खीरगंगा की दिशा से आई आपदा ने भारी तबाही मचाई थी। अचानक आए मलबे और पानी के तेज बहाव ने कस्बे के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। घटना के समय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आंध्र प्रदेश के दौरे पर थे। आपदा की जानकारी मिलते ही उन्होंने अधिकारियों को तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री अपना दौरा बीच में छोड़कर उसी शाम देहरादून लौट आए। उन्होंने गृह सचिव को पूरे राहत एवं बचाव अभियान की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी। उत्तरकाशी जिला प्रशासन के साथ समन्वय के लिए दो आईएएस अधिकारियों को तैनात किया गया, जबकि मंडलायुक्त को नोडल अधिकारी बनाया गया।

सेना, NDRF और SDRF ने संभाला मोर्चा

आपदा के बाद शासन और जिला प्रशासन के साथ सेना, NDRF, SDRF तथा स्थानीय स्वयंसेवकों ने मिलकर राहत एवं बचाव अभियान चलाया। प्रभावित क्षेत्र में फंसे लोगों तक मदद पहुंचाने और जरूरी सेवाओं को बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हेली ऑपरेशन के जरिए भी राहत कार्यों को गति दी गई। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया।

अगले दिन ग्राउंड जीरो पर पहुंचे CM धामी

आपदा के अगले ही दिन 6 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं धराली पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और मौके पर चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक तेजी से सहायता पहुंचाने और राहत अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। इसके बाद भी सरकार की ओर से लगातार स्थिति की समीक्षा की जाती रही।

PM मोदी और अमित शाह ने भी ली जानकारी

धराली आपदा के बाद केंद्र सरकार ने भी हालात पर लगातार नजर रखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से संपर्क कर स्थिति की जानकारी ली और राहत एवं बचाव अभियान की प्रगति के बारे में जानकारी लेते रहे। केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय के चलते राहत अभियान को आवश्यक संसाधन और गति उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।

35.30 करोड़ रुपये से हुआ पुनर्निर्माण

राहत और बचाव अभियान के बाद सरकार ने प्रभावित क्षेत्र में पुनर्वास और पुनर्निर्माण का काम मिशन मोड में आगे बढ़ाया। जिन परिवारों को आपदा में भारी नुकसान हुआ, उन्हें आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई। इसके साथ ही क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों, पेयजल व्यवस्था और बिजली जैसी जरूरी सुविधाओं को दोबारा बहाल करने का काम किया गया। जिन लोगों ने अपने घर और आजीविका खो दी थी, उन्हें दोबारा जीवन शुरू करने में मदद दी गई। सरकार के अनुसार, धराली में पुनर्वास और पुनर्निर्माण से जुड़े कार्यों पर 35.30 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इन प्रयासों के बाद अब धराली धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट चुका है।

आपदा के बाद धराली ने दिखाई नई उम्मीद

धराली की एक साल की यात्रा प्राकृतिक आपदा के बाद पुनर्निर्माण और जनसहयोग की कहानी भी है। आपदा ने जहां लोगों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी की, वहीं स्थानीय लोगों के साहस और प्रशासनिक प्रयासों ने उन्हें दोबारा खड़े होने की ताकत दी। धराली अब उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। यह घटना यह भी बताती है कि प्राकृतिक आपदाओं को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन बेहतर तैयारी, त्वरित निर्णय, मजबूत समन्वय और प्रभावी राहत व्यवस्था से उनके प्रभाव को कम किया जा सकता है। एक साल बाद धराली के लोगों के लिए आपदा की यादें भले ही दर्दनाक हों, लेकिन आज यहां जिंदगी फिर से आगे बढ़ रही है और लोग अपने भविष्य को नए सिरे से संवारने में जुटे हैं।

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