उत्तराखंड

अंकिता भंडारी केस पर CM धामी बोले- ‘अंकिता हमारी बेटी थी’, न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान जरूरी

देहरादून:- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस के विभिन्न आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष की ओर से सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों की सच्चाई तथ्यों और दस्तावेजों के सामने आने के बाद स्पष्ट हो रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक मुद्दों पर बहस तथ्यात्मक आधार पर होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने ये बातें कैंप कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहीं। उन्होंने हल्द्वानी की घटना, उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB), बिजली खरीद और अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर कांग्रेस के सवालों पर सरकार का पक्ष रखा।

हल्द्वानी की घटना पर कांग्रेस के आरोपों का जवाब

हल्द्वानी की एक घटना को कांग्रेस की ओर से जातिगत भेदभाव से जोड़ने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद सामने आए तथ्यों को भी देखा जाना चाहिए। धामी ने दावा किया कि घटना से जुड़े पांच लोग अनुसूचित जाति समाज से थे और ऐसे में घटना को जातिगत भेदभाव से जोड़कर देखने पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि संवेदनशील सामाजिक विषयों पर राजनीतिक बयानबाजी करने से पहले तथ्यों की पूरी पड़ताल जरूरी है।

UIIDB की 7,000 बीघा जमीन के आरोप पर क्या बोले धामी?

उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड को लेकर कांग्रेस के 7,000 बीघा जमीन दिए जाने के आरोप पर भी मुख्यमंत्री ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि UIIDB को अब तक 45 एकड़ भूमि ही उपलब्ध कराई गई है। इससे पहले कांग्रेस ने करीब 7,000 बीघा सरकारी जमीन निजी निवेशकों को लंबे समय के पट्टे पर देने की योजना को लेकर सवाल उठाए थे। सरकार की ओर से इस दावे को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि UIIDB का उद्देश्य पर्यटन और आधारभूत ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं के माध्यम से निवेश, आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। UIIDB की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक बोर्ड PPP के जरिए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और निवेश को बढ़ावा देने के लिए काम करता है।

बिजली खरीद पर कांग्रेस के सवालों का भी दिया जवाब

ऊर्जा खरीद को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष को मौजूदा फैसलों पर सवाल उठाने के साथ अपने शासनकाल में हुए बिजली समझौतों को भी देखना चाहिए। धामी के मुताबिक, कांग्रेस सरकार के समय हुए गैस पावर करार के चलते वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य को गैस आधारित बिजली के लिए 31.71 रुपये प्रति यूनिट तक भुगतान करना पड़ा। इसके मुकाबले वर्तमान सरकार ने 1320 मेगावाट बिजली करीब 5.74 रुपये प्रति यूनिट की दर से 25 साल के लिए सुनिश्चित की है। ये आंकड़े भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की ओर से भी हालिया बयान में रखे गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीक ऑवर में राज्य को कई बार महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। ऐसे में सरकार का तर्क है कि लंबी अवधि के लिए बिजली की उपलब्धता ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी। हालांकि, इस बिजली खरीद व्यवस्था को लेकर कांग्रेस की ओर से प्रक्रिया, दर और दीर्घकालिक वित्तीय बोझ सहित कई सवाल उठाए गए हैं।

‘आरोप तथ्यों की कसौटी पर कमजोर पड़ रहे’

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर अलग-अलग मुद्दों को लेकर भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक सवाल का जवाब तथ्यों, दस्तावेजों और पारदर्शिता के साथ देने के लिए तैयार है। धामी के मुताबिक, विपक्ष राष्ट्रीय स्तर पर ईवीएम, चुनाव आयोग और एसआईआर जैसे मुद्दों को लेकर सवाल उठाता है और उत्तराखंड में भी अलग-अलग विषयों पर सरकार को घेर रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन बहस तथ्य आधारित होनी चाहिए।

अंकिता भंडारी मामले पर भी CM ने रखा सरकार का पक्ष

अंकिता भंडारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने मामले में शुरुआत से कानूनी कार्रवाई की। मामले में निचली अदालत ने तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अगस्त 2026 में उत्तराखंड हाईकोर्ट में भी तीनों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज होने की रिपोर्ट सामने आई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंकिता के माता-पिता की मांग पर राज्य सरकार ने मामले की CBI जांच की संस्तुति की थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ने जनवरी 2026 में CBI जांच की सिफारिश की और फरवरी 2026 में CBI ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

‘अंकिता हमारी बेटी थी…’

मुख्यमंत्री ने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए सरकार शुरुआत से कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए। धामी ने कहा कि सरकार अपने फैसलों में नियम, पारदर्शिता और प्रदेशहित को प्राथमिकता दे रही है और विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवालों का जवाब तथ्यों के आधार पर दिया जाएगा।

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