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दिल्ली बिल्डिंग हादसे पर मायावती ने जताया दुख, लापरवाही और भ्रष्टाचार पर सरकार को घेरा

दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला पीजी हॉस्टल की इमारत गिरने से हुए दर्दनाक हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई। राहत और बचाव एजेंसियों ने देर रात तक अभियान चलाकर मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की। इस हादसे पर उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने दिल्ली की घटना के साथ मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने से 18 लोगों की मौत और करीब 190 लोगों के बीमार होने की घटना पर भी शोक व्यक्त किया। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लगातार दो पोस्ट किए। उन्होंने कहा कि दक्षिण दिल्ली में पांच मंजिला पीजी हॉस्टल के ढहने से हुई मौतें बेहद दुखद और चिंताजनक हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के अस्पताल में भर्ती होने का भी जिक्र किया। मायावती ने उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में बाढ़ से हुई जान-माल की तबाही पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एक के बाद एक सामने आ रही ऐसी घटनाएं बेहद गंभीर हैं और सरकारों को जनहित से जुड़े मामलों में अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। अपने दूसरे पोस्ट में मायावती ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि शासन और प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन नहीं कर रहे हैं। मायावती ने अधिकारियों की लापरवाही, उदासीनता और भ्रष्टाचार पर भी सख्ती से लगाम लगाने की जरूरत बताई। उन्होंने सरकारों से जनहित और जनकल्याण से जुड़े मामलों में व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने की अपील की। वहीं, सत्य निकेतन हादसे के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए NDRF के जवानों के साथ विशेष प्रशिक्षित श्वान दस्ते की भी मदद ली गई।

NDRF की दो टीमों में करीब 70 कर्मी और एक श्वान दस्ता मलबे में संभावित जीवित लोगों की तलाश में जुटा रहा। बचाव दल ने मलबे को सावधानी से हटाया ताकि अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। NDRF के अधिकारियों के मुताबिक, मलबे में फंसे लोगों को सांस लेने में मदद पहुंचाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर भी नीचे भेजे गए। घटनास्थल पर दमकल की गाड़ियां और अन्य राहत उपकरण लगातार तैनात रहे। बचाव अभियान में दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), दिल्ली नगर निगम, कैट्स और नागरिक सुरक्षा की टीमें भी शामिल रहीं। स्थानीय लोग और प्रत्यक्षदर्शी भी बचाव दल की मदद के लिए आगे आए और अपने स्तर पर मलबा हटाने में जुट गए। हादसे के दौरान मलबे में फंसे कुछ छात्रों की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए। बताया गया कि कुछ लोग अपने मोबाइल फोन के जरिए बाहर मौजूद लोगों से मदद मांग रहे थे। इन तस्वीरों ने हादसे की भयावहता को और बढ़ा दिया।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की ओर से जारी बयान के मुताबिक, ट्रॉमा सेंटर में कुल 10 घायल लोगों को लाया गया। इनमें चार लोगों को मृत अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। AIIMS के अनुसार, तीन मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है। एक मरीज की सर्जरी की गई, जबकि मामूली चोट वाले एक मरीज को निगरानी के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पुलिस ने इस मामले में साउथ कैंपस थाने में इमारत के मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने समेत अन्य धाराओं में कार्रवाई की गई है। पुलिस के मुताबिक, यह इमारत पीजी के तौर पर इस्तेमाल की जा रही थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि भूतल पर मरम्मत का काम चल रहा था। आशंका है कि इसी दौरान हुए बदलाव या लापरवाही के कारण इमारत की संरचना कमजोर हुई और पूरी इमारत भरभराकर गिर गई।

मामले में आरोपित लोगों की तलाश के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं। पुलिस हादसे के कारणों की भी जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इमारत में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली पुलिस आयुक्त और NDRF के महानिदेशक से हादसे की जानकारी ली। उन्होंने राहत एवं बचाव अभियान की स्थिति की समीक्षा की। अमित शाह ने कहा कि स्थानीय प्रशासन और NDRF की टीमें तेजी से बचाव कार्य में जुटी हैं। उन्होंने घायलों को हर संभव चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने की बात कही और सभी घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। सत्य निकेतन हादसे ने एक बार फिर दिल्ली में पुरानी और बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से यह साफ होगा कि इमारत गिरने के पीछे वास्तविक कारण क्या था और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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