राष्ट्रीय

30 साल की उम्र सीमा से लेकर छात्रावास सुविधाओं तक, आदिवासी छात्रों के मुद्दे पर सियासी टकराव

महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों की समस्याओं को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर प्रदर्शन कर रहे आदिवासी छात्रों की समस्याओं का जल्द समाधान करने और उनसे व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने की मांग की। इसके जवाब में महाराष्ट्र भाजपा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें महाराष्ट्र पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस शासित तेलंगाना और कर्नाटक में आदिवासी कल्याण विभागों और छात्रावासों की स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए। राहुल गांधी ने अपने पत्र में महाराष्ट्र के सरकारी आदिवासी छात्रावासों से जुड़े नियमों और सुविधाओं को लेकर चिंता जताई। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि छात्रावासों में रहने के लिए 30 वर्ष की आयु सीमा जैसी शर्तें लागू की जा रही हैं। इसके अलावा छात्रों ने कथित तौर पर कई ऐसे नियमों और सुविधाओं पर भी आपत्ति जताई है, जिन्हें वे अपमानजनक और असुरक्षित मानते हैं। इन मांगों को लेकर कुछ आदिवासी छात्र पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री फडणवीस से आग्रह किया कि वह प्रदर्शनकारी छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मिलें और उनकी समस्याओं को समझते हुए जल्द समाधान निकालें। उन्होंने छात्रावासों में रहने के लिए लागू 30 वर्ष की आयु सीमा जैसी शर्तों में राहत देने की मांग भी की। राहुल गांधी का कहना है कि दूरदराज के इलाकों से आने वाले आदिवासी छात्र किसी तरह की खैरात नहीं मांग रहे, बल्कि शिक्षा और सुरक्षित सुविधाओं से जुड़े अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, इस कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने आदिवासी छात्रावासों में कथित तौर पर असुरक्षित सुविधाओं और कुछ ऐसे नियमों की शिकायत की, जिन्हें वे अपमानजनक मानती हैं। उन्होंने महिलाओं की गर्भावस्था की जांच जैसे कथित प्रावधानों का भी उल्लेख किया और इन्हें अमानवीय बताया। हालांकि, इन आरोपों को लेकर संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया अलग-अलग हो सकती है। राहुल गांधी के आरोपों के बाद भाजपा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस शासित राज्यों का मुद्दा उठाया। महाराष्ट्र भाजपा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि राहुल गांधी को पहले तेलंगाना और कर्नाटक में आदिवासी कल्याण विभागों तथा छात्रावासों के कामकाज की स्थिति देखनी चाहिए। भाजपा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बिना पूरी स्थिति की जांच किए महाराष्ट्र सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। भाजपा ने महाराष्ट्र के कुछ आदिवासी विद्यालयों को लेकर भी कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी का दावा है कि जिन कुछ आदिवासी विद्यालयों को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं, उनका संचालन कांग्रेस से जुड़े नेताओं द्वारा किया जाता है। भाजपा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ऐसे संस्थानों से जुड़े लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित कांग्रेस नेताओं का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।

भाजपा ने गढ़चिरौली के एक विद्यालय का जिक्र करते हुए दावा किया कि कुछ दिन पहले वहां तीन किशोरियों की मौत हुई थी। पार्टी के मुताबिक, विद्यालय के निदेशक मारोतराव कोवासे पूर्व कांग्रेस सांसद हैं, जबकि उनके बेटे विश्वजीत कोवासे गढ़चिरौली जिला कांग्रेस समिति के अध्यक्ष और विद्यालय के सचिव हैं। भाजपा ने इन तथ्यों का हवाला देते हुए कांग्रेस पर आदिवासी छात्रों से जुड़े संस्थानों की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। महाराष्ट्र भाजपा ने यवतमाल के एक आश्रम विद्यालय का भी मुद्दा उठाया। पार्टी ने दावा किया कि निरीक्षण के दौरान वहां छात्राओं के शौचालयों में दरवाजे नहीं पाए गए। भाजपा के अनुसार, इस विद्यालय का संचालन पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता वसंत पुरके करते हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के सत्ता में रहने के दौरान कुछ आदिवासी विद्यालयों को अपने प्रभाव में लिया गया और उनका गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। भाजपा ने कांग्रेस नेताओं पर आदिवासी समुदाय के शोषण का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि किसी संस्था या व्यक्ति के खिलाफ नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले हैं तो कार्रवाई की प्रक्रिया को राजनीतिक दबाव के कारण नहीं रोका जाना चाहिए। सत्तारूढ़ दल ने दावा किया कि महाराष्ट्र सरकार आदिवासी छात्रों और समुदाय के हितों की रक्षा करने में सक्षम है और पूरे मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी ओर, राहुल गांधी का फोकस छात्रों की शिकायतों और उनके अधिकारों पर है। उनका कहना है कि सरकार को प्रदर्शन कर रहे छात्रों की बात सीधे सुननी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। इस मुद्दे ने अब छात्रावासों की व्यवस्था, आदिवासी छात्रों के लिए सुविधाओं और नियमों के साथ-साथ राजनीतिक जवाबदेही को भी बहस के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों की मांगों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी है। एक ओर राहुल गांधी मुख्यमंत्री से छात्रों से मुलाकात कर उनकी मांगों पर तत्काल फैसला लेने की अपील कर रहे हैं, वहीं भाजपा कांग्रेस शासित राज्यों और कांग्रेस नेताओं से जुड़े आदिवासी विद्यालयों की स्थिति का हवाला देकर पलटवार कर रही है। अब देखना होगा कि सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और इस पूरे विवाद में आरोपों की आधिकारिक जांच से क्या तथ्य सामने आते हैं।

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