थानी गांव में नशे को लेकर विवाद के बीच महिलाओं का दावा, संदिग्धों की आवाजाही से बढ़ी चिंता

देहरादून: राजपुर थाना क्षेत्र के ओल्ड मसूरी रोड स्थित थानी गांव में कथित तौर पर बढ़ती नशे की गतिविधियों और रात के समय संदिग्ध लोगों की आवाजाही से परेशान महिलाओं ने खुद गांव की सुरक्षा का जिम्मा संभाल लिया है। करीब 350 परिवारों वाले गांव की 30 से 35 महिलाएं बच्चों और युवाओं को नशे से बचाने के उद्देश्य से शाम से देर रात तक गांव की सड़कों पर निगरानी कर रही हैं। महिलाओं का आरोप है कि बाहरी लोग रात के समय नशा खरीदने के लिए गांव में पहुंचते हैं। कई बार संदिग्ध लोगों के बीच विवाद की स्थिति भी बनती है। उनका कहना है कि पुलिस से शिकायत के बाद कुछ समय के लिए पुलिस और पीएसी की तैनाती की गई, लेकिन नियमित गश्त नहीं होने पर महिलाओं ने खुद पहरा शुरू करने का फैसला किया।
शाम 5 बजे से रात 12 बजे तक करती हैं निगरानी
महिलाओं के अनुसार, उनकी ड्यूटी रोजाना शाम करीब 5 बजे शुरू होती है और रात 12 बजे तक चलती है। गांव के किसी हिस्से में बाहरी या संदिग्ध व्यक्ति के पहुंचने की जानकारी मिलते ही महिलाएं एक-दूसरे को फोन कर सतर्क करती हैं और कई महिलाएं मौके पर पहुंच जाती हैं। महिलाओं का कहना है कि वे संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर उन्हें वहां से लौटने के लिए कहती हैं। घर और परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के बाद रात में निगरानी करना आसान नहीं है, लेकिन गांव को नशे की गतिविधियों से बचाने के लिए उन्होंने यह जिम्मेदारी उठाई है। बारिश के मौसम को देखते हुए बुजुर्ग महिलाओं के पहरे का समय कम किया गया है।
महिलाओं का दावा- कई वर्षों से बढ़ रही नशे की गतिविधियां
स्थानीय महिला सुधा ने दावा किया कि पिछले करीब 6 से 7 वर्षों से गांव में नशे से जुड़ी गतिविधियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। उनके अनुसार, रात के समय कई अनजान लोग गांव से होकर गुजरते हैं और तेज रफ्तार से वाहन चलाते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को भी परेशानी होती है। महिलाओं का यह भी दावा है कि नशा खरीदने वालों में स्कूल और कॉलेज के छात्र भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, उनका कहना है कि कथित तौर पर नशे का कारोबार करने वाले सभी लोगों की पहचान या उनके नाम की पूरी जानकारी उनके पास नहीं है।
मंदिर विवाद को लेकर पुलिस ने दी अलग जानकारी
राजपुर थाना प्रभारी पीड़ी भट्ट ने मामले को लेकर अलग पक्ष रखा है। उनका कहना है कि थानी गांव में मंदिर को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद चल रहा है और सपेरा बस्ती के लोगों को मंदिर में दर्शन करने से रोके जाने का मामला सामने आया है। थाना प्रभारी के अनुसार, गांव के कुछ लोग नशे की गतिविधियों का हवाला देते हुए बस्ती के लोगों को रोक रहे हैं।
शिकायत के बाद दो दिन रही पुलिस और पीएसी की तैनाती
महिला सुधा के मुताबिक, उन्होंने राजपुर थाना पुलिस और अन्य पुलिस अधिकारियों से गांव में नशे की गतिविधियों की शिकायत की थी। इसके बाद कुठाल गेट चौकी से पुलिसकर्मी गांव पहुंचे। महिलाओं का कहना है कि करीब दो दिन तक एक पीएसी जवान और एक कांस्टेबल की तैनाती भी की गई। हालांकि, उनका दावा है कि इसके बाद नियमित पुलिस गश्त नहीं हो सकी। महिलाओं के अनुसार, 14 अगस्त के बाद गांव में पुलिस की नियमित मौजूदगी नजर नहीं आई, जिसके बाद उन्होंने सामूहिक रूप से रात में पहरा देने का निर्णय लिया।
महिलाओं का कहना- अभियान से जुड़ने पर मिल रही हैं धमकियां
स्थानीय निवासी सुनीता शर्मा ने बताया कि इस समूह में करीब 30 से 35 महिलाएं शामिल हैं, जिनमें युवा और बुजुर्ग दोनों शामिल हैं। किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलते ही महिलाएं एक साथ मौके पर पहुंचती हैं। महिलाओं का कहना है कि नशे के खिलाफ चलाए जा रहे उनके अभियान से कथित तौर पर इस गतिविधि से जुड़े लोगों को परेशानी हो रही है और उन्हें धमकियां भी मिलती हैं। उनका कहना है कि वे किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहतीं और गांव की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस को संभालनी चाहिए।
अब जिलाधिकारी से मिलकर करेंगी नियमित गश्त की मांग
महिलाओं ने कहा कि लंबे समय तक लाठी-डंडों के साथ रात में पहरा देना उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए अब वे जिलाधिकारी से मुलाकात कर गांव में नियमित पुलिस गश्त, कथित नशे के कारोबार पर कार्रवाई और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करेंगी। फिलहाल महिलाओं ने स्पष्ट किया है कि नशे के खिलाफ उनका अभियान जारी रहेगा। उनका कहना है कि गांव के बच्चों और युवाओं को नशे की चपेट में आने से बचाने के लिए प्रशासन को भी गंभीर और प्रभावी कदम उठाने चाहिए।




