पंजाब

रंधावा-चन्नी-आशू की तिकड़ी ने बढ़ाया सियासी पारा, कांग्रेस में CM फेस को लेकर नई बहस

पंजाब कांग्रेस में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर अंदरूनी खींचतान तेज होती दिखाई दे रही है। लुधियाना में हुए शक्ति प्रदर्शन के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने खुलकर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का सीएम चेहरा घोषित करने की मांग उठाई।  रंधावा ने दिल्ली हाईकमान को साफ संदेश देते हुए कहा कि पंजाब को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो मौजूदा मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार को चुनौती दे सके। उन्होंने चन्नी के 111 दिन के कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि इस दौरान कई ऐसे फैसले लिए गए, जिन्हें प्रदेश की जनता आज भी याद करती है। रंधावा के मुताबिक चन्नी के पास प्रशासन चलाने का अनुभव होने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ भी है। उन्होंने कहा कि चन्नी अपने कार्यकाल में आम लोगों और कार्यकर्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनते थे और जरूरत पड़ने पर मंत्रियों के घर तक जाकर काम करवाते थे।

लुधियाना के कार्यक्रम में चन्नी के साथ पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू की मौजूदगी भी राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। तीनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी को चन्नी खेमे की ओर से 2027 के लिए एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। रंधावा ने मंच से कांग्रेस की सोशल इंजीनियरिंग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चन्नी अनुसूचित जाति नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि वह जट्ट सिख चेहरा हैं और भारत भूषण आशू शहरी हिंदू समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके मुताबिक इन तीनों चेहरों का साथ आना पंजाब में कांग्रेस की व्यापक सामाजिक पहुंच को दिखाता है। रंधावा ने इसी दौरान धान भंडारण और राइस मिलर्स की समस्याओं को लेकर भी पंजाब सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि फूड स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य के तौर पर पंजाब आने पर वह अधिकारियों और मुख्यमंत्री से इन मुद्दों पर जवाब मांगेंगे।

हालांकि चन्नी को सीएम चेहरा बनाने की मांग के बीच उनके हालिया बयानों ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के सामने एक अलग चुनौती खड़ी कर दी है। 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले को लेकर चन्नी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है और सज्जन कुमार पर तीखी टिप्पणी की है। चन्नी ने सज्जन कुमार को सिखों का कातिल और गद्दार बताते हुए कहा कि दिल्ली में सिखों को जिंदा जलाने वालों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई होनी चाहिए थी। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर भी राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। चन्नी ने कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा की उस टिप्पणी पर भी पलटवार किया, जिसमें सज्जन कुमार को लेकर कथित तौर पर सकारात्मक संदर्भ दिए जाने की बात सामने आई थी। चन्नी ने हुड्डा को संभलकर बोलने और अपनी जुबान पर लगाम रखने की हिदायत दी। राजनीतिक तौर पर चन्नी के इन बयानों को पंजाब की स्थानीय भावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। 1984 के दंगों का मुद्दा पंजाब की राजनीति में बेहद संवेदनशील रहा है और कांग्रेस के लिए भी यह लंबे समय से चुनौतीपूर्ण विषय रहा है। अब सवाल यह है कि क्या पंजाब कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व 2027 के चुनाव से पहले चन्नी को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाएगा या पार्टी सामूहिक नेतृत्व के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। लुधियाना में रंधावा, चन्नी और आशू की एकजुटता ने फिलहाल इतना जरूर संकेत दिया है कि पंजाब कांग्रेस के भीतर सीएम चेहरे की लड़ाई आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।

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