20 हजार की ट्रेनिंग, 500 रुपये की दिहाड़ी… खिलाड़ी का संघर्ष देख भावुक हुए लोग

उत्तराखंड से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने खेल व्यवस्था और खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देहरादून के एक शादी समारोह में सिक्योरिटी गार्ड की वर्दी पहनकर वाहनों की पार्किंग कराते एक युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पहले लोगों ने उसे एक सामान्य दिहाड़ी कर्मचारी समझा, लेकिन जब उसकी असली पहचान सामने आई तो हर कोई हैरान रह गया। वह कोई साधारण कर्मचारी नहीं, बल्कि उत्तराखंड का राष्ट्रीय स्तर का गोल्ड मेडलिस्ट MMA फाइटर वीरेंद्र सिंह है। वीडियो में नजर आने वाले वीरेंद्र सिंह उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के चिन्खाली गांव के निवासी हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं। खेल में लगातार सफलता मिलने के बावजूद आर्थिक तंगी ने उन्हें 500 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी पर शादी समारोहों में पार्किंग ड्यूटी करने के लिए मजबूर कर दिया है। वीरेंद्र बताते हैं कि प्रोफेशनल MMA में बने रहने के लिए हर महीने करीब 20 हजार रुपये का खर्च आता है। इसमें ट्रेनिंग, डाइट, जिम, सप्लीमेंट, उपकरण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने का खर्च शामिल होता है। परिवार की सीमित आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें यह खर्च खुद उठाना पड़ता है। यही वजह है कि वह दिन में दिहाड़ी करते हैं और बाकी समय अपनी ट्रेनिंग जारी रखते हैं।
वीरेंद्र सिंह के पिता त्रिलोक सिंह सशस्त्र सीमा बल (SSB) में कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बेटे के सपनों को पूरा करने में हमेशा साथ दिया। वीरेंद्र ने शुरुआत बॉक्सिंग से की और जिला व राज्य स्तर पर कई गोल्ड मेडल जीते। बाद में अंतरराष्ट्रीय MMA फाइटर अंगद बिष्ट से प्रेरित होकर उन्होंने प्रोफेशनल MMA को अपना करियर बनाया। वर्ष 2024 से वह देहरादून स्थित म्यूटेंट MMA अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे हैं। वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर लोग वीरेंद्र सिंह के संघर्ष की जमकर सराहना कर रहे हैं। कई लोगों ने सवाल उठाया कि राष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को यदि अपने खेल का खर्च निकालने के लिए दिहाड़ी करनी पड़े, तो यह खेल व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। लोगों ने सरकार, खेल विभाग और सामाजिक संगठनों से ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की आर्थिक मदद करने की भी अपील की है। वीरेंद्र सिंह का कहना है कि आर्थिक मुश्किलें चाहे जितनी भी हों, उनका सपना नहीं बदलेगा। उनका लक्ष्य भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतना है। उनका कहना है



