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दिशा सालियन मामले में सियासी घमासान, संजय राउत ने CBI जांच को बताया राजनीतिक साजिश

दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत के मामले में CBI की ओर से FIR दर्ज किए जाने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश करार दिया है। संजय राउत ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि दिशा सालियन मामले में दर्ज की गई CBI की FIR का इस्तेमाल ठाकरे परिवार की छवि खराब करने के लिए किया जा रहा है। राउत ने कहा कि दिशा सालियन की मौत के मामले में आया नया मोड़ सामान्य कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कोर्ट के आदेश और उसके बाद हुई जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए। सांसद ने कहा कि अदालत के आदेश में CBI जांच की बात कही गई है, लेकिन किसी व्यक्ति का नाम आरोपी के तौर पर नहीं लिया गया है। इसके बावजूद मीडिया में कुछ नामों को लेकर चर्चा की जा रही है।

राउत की यह प्रतिक्रिया उस समय सामने आई है जब CBI ने दिशा सालियन की मौत के मामले में FIR दर्ज की है। दिशा सालियन ने कुछ समय तक अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर के तौर पर काम किया था। दिशा के पिता की ओर से दायर याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद CBI ने मामला दर्ज किया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक FIR में किसी आरोपी का नाम दर्ज नहीं किया गया है। CBI की जांच में दिशा सालियन की मौत से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को खंगाला जाएगा। इनमें दुष्कर्म, हत्या और कथित तौर पर मौत को छिपाने की साजिश से जुड़े आरोप भी शामिल हैं। इस पूरे मामले को लेकर संजय राउत ने आदित्य ठाकरे का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि CBI जांच का इस्तेमाल आदित्य ठाकरे को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। राउत के मुताबिक आदित्य ठाकरे लगातार महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार को अलग-अलग सार्वजनिक मुद्दों पर घेरते रहे हैं। ऐसे में उन्होंने दावा किया कि दिशा सालियन केस को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

शिवसेना (यूबीटी) सांसद ने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई ठाकरे परिवार की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि ठाकरे परिवार लंबे समय से महाराष्ट्र की राजनीति में प्रभावशाली रहा है और लोगों के बीच उसकी अपनी पहचान है। राउत ने यह भी दावा किया कि मामले को उठाने के पीछे अन्य राजनीतिक उद्देश्य भी हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दिशा सालियन केस के जरिए मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे के आंदोलन से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा राउत ने संसद में परिसीमन बिल को लेकर भी राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि शिवसेना (यूबीटी) पर दबाव बनाने के लिए इस मामले को राजनीतिक तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। दिशा सालियन की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक रिहायशी इमारत की 12वीं मंजिल से गिरने के बाद हुई थी। उस समय उनकी उम्र 28 वर्ष थी।

शुरुआत में उनकी मौत को हादसे से हुई मौत यानी एक्सीडेंटल डेथ के तौर पर दर्ज किया गया था। बाद में इसे आत्महत्या के एंगल से भी देखा गया। दिशा सालियन की मौत के कुछ ही दिनों बाद 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत अपने बांद्रा स्थित घर में मृत पाए गए थे। दोनों घटनाओं के बीच समय का अंतर बेहद कम होने के कारण सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में दोनों मामलों के बीच संभावित संबंध को लेकर कई तरह के दावे और अटकलें सामने आई थीं। हालांकि, दिशा सालियन और सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर अलग-अलग स्तर पर जांच और कानूनी प्रक्रियाएं चलती रही हैं। अब दिशा सालियन मामले में CBI की FIR दर्ज होने के बाद जांच का एक नया चरण शुरू हुआ है। संजय राउत ने CBI की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जांच एजेंसी को अपना काम निष्पक्ष तरीके से करना चाहिए और किसी भी राजनीतिक उद्देश्य के लिए जांच का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

वहीं, इस मामले में CBI की जांच आगे बढ़ने के साथ कई पुराने सवालों की भी दोबारा पड़ताल हो सकती है। जांच एजेंसी अब उपलब्ध सबूतों, परिस्थितियों और मामले से जुड़े आरोपों की जांच करेगी। फिलहाल दिशा सालियन केस को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। CBI की FIR के बाद जहां जांच को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं, वहीं विपक्ष की ओर से इसे राजनीतिक साजिश बताए जाने से मामला और ज्यादा राजनीतिक रंग ले चुका है। आने वाले दिनों में CBI की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या नए तथ्य सामने आते हैं, इस पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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