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लेक्चरर से प्रिंसिपल और अब राम मंदिर ट्रस्ट की सदस्य तक, जानिए डॉ. निर्मला यादव का सफर

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में नई सदस्य के रूप में शामिल की गईं शिक्षाविद डॉ. निर्मला यादव ने अपनी नियुक्ति को भगवान राम की कृपा बताया है। गुरुवार को उन्होंने कहा कि देशभर से उनका चयन होना उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी और सम्मान की बात है। डॉ. निर्मला यादव ने कहा कि उनका मानना है कि भगवान की इच्छा और कृपा के बिना कुछ भी संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए चुना गया है, इसलिए अब वह पूरी लगन, मेहनत और ईमानदारी के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाने का प्रयास करेंगी। उन्होंने कहा कि उनके चयन में किसी व्यक्ति विशेष की भूमिका नहीं है और वह इसे भगवान की कृपा मानती हैं। डॉ. यादव ने कहा कि भगवान राम की सेवा का अवसर मिलना उनके जीवन का बेहद महत्वपूर्ण क्षण है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव करते हुए रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया था। इसके साथ ही ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को भी शामिल किया गया। इनमें शिक्षाविद डॉ. निर्मला यादव, वरिष्ठ वकील मदन मोहन पांडे और व्यवसायी एवं समाजसेवी महेश भागचंदका शामिल हैं। ट्रस्ट में ये पद पिछले कुछ समय से खाली थे। पिछले वर्ष बिमलेंद्र मोहन मिश्रा के निधन के बाद एक पद रिक्त हुआ था, जबकि पूर्व महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों के बाद अन्य पद खाली हुए थे। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद डॉ. निर्मला यादव ने कहा कि वह अपने सिद्धांतों से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट से जुड़ी हर जिम्मेदारी को ईमानदारी और पूरी निष्ठा के साथ निभाना उनका उद्देश्य रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन, व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और सुरक्षा से जुड़े जिन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता होगी, वहां वह अपने अनुभव के आधार पर सुझाव देंगी। डॉ. यादव ने कहा कि राम लला का बुलावा आने के बाद अब उनके सामने एक नई और बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वह पूरी लगन के साथ काम करते हुए मंदिर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में अपनी भूमिका निभाने की कोशिश करेंगी। उन्होंने अपने चयन को ‘मातृ शक्ति’ के प्रतिनिधित्व के रूप में भी बताया। उनका कहना है कि ट्रस्ट में महिलाओं की भागीदारी और महिला शक्ति का प्रतिनिधित्व उनके लिए विशेष महत्व रखता है।

पूर्व प्रिंसिपल और शिक्षाविद डॉ. निर्मला यादव लंबे समय से शिक्षा और सामाजिक संगठनों से जुड़ी रही हैं। उनका शैक्षणिक और सामाजिक जीवन कई दशकों के अनुभव से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता महावीर सिंह यादव और राजवती अब इस दुनिया में नहीं हैं। वहीं उनके ससुर पूर्व मेजर सूर्य कुमार यादव सेवानिवृत्ति के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS से जुड़े रहे। डॉ. यादव के अनुसार, समय के साथ उनका परिवार भी संघ से जुड़े सामाजिक और वैचारिक कार्यों से जुड़ता गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1983 में विवाह के बाद उनकी मुलाकात RSS और बजरंग दल के कई पदाधिकारियों से हुई, जो उनके घर आते-जाते थे। इसके बाद उनका झुकाव शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों की ओर बढ़ता गया। उन्होंने सरस्वती शिशु मंदिरों से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। डॉ. निर्मला यादव ने बताया कि उनकी बेटी शिकोहाबाद के बालिका विद्या मंदिर की शुरुआती छात्राओं में शामिल रही। बाद में यह संस्थान आगे बढ़कर इंटरमीडिएट कॉलेज के रूप में विकसित हुआ। उनके शैक्षणिक करियर की शुरुआत वर्ष 1987 में हुई, जब वह शिकोहाबाद के BDM म्युनिसिपल गर्ल्स कॉलेज में लेक्चरर नियुक्त हुईं।

अपने लंबे अनुभव और कार्य के आधार पर वर्ष 1999 में उन्हें इसी संस्थान में प्रिंसिपल की जिम्मेदारी सौंपी गई। शिक्षा के क्षेत्र में उनके प्रशासनिक और अकादमिक अनुभव ने उनकी पहचान को और मजबूत किया। वर्ष 2006 में डॉ. निर्मला यादव ने फिरोजाबाद के महात्मा गांधी PG कॉलेज में प्रिंसिपल का पद संभाला। उन्होंने इस पद पर लंबे समय तक काम किया और वर्ष 2022 में सेवानिवृत्त हुईं। डॉ. यादव अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से भी लंबे समय से जुड़ी रही हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1999 में संगठन के पदाधिकारी ओम पाल सिंह से मुलाकात के बाद उनका इस संगठन से जुड़ाव शुरू हुआ। उन्होंने वर्ष 2019 से 2022 तक संगठन में उपाध्यक्ष और राज्य अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारियां निभाईं। वर्तमान में भी वह संगठन की वर्किंग काउंसिल से जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा डॉ. निर्मला यादव अखिल भारतीय सह-संपर्क प्रमुख की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। शिक्षा और सामाजिक संगठनों में लंबे अनुभव के कारण उन्हें विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रही हैं। उन्होंने आगरा स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल में भी काम किया है। वह राज्यपाल द्वारा नामित सदस्य के रूप में करीब दो वर्षों तक इस जिम्मेदारी से जुड़ी रहीं। अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सदस्य के रूप में उनकी नियुक्ति को एक नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी माना जा रहा है। डॉ. निर्मला यादव का कहना है कि वह पूरी निष्ठा के साथ काम करते हुए मंदिर व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं में सकारात्मक योगदान देने का प्रयास करेंगी।

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