पंजाब

होशियारपुर में फिर गरमाएगी सियासत, विकास के दावों पर जिंपा-अरोड़ा आमने-सामने

2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर होशियारपुर विधानसभा क्षेत्र में सियासी हलचल तेज होने लगी है। चुनाव में स्थानीय समस्याएं और पिछले पांच वर्षों का विकास कार्य प्रमुख मुद्दा बन सकते हैं। जलभराव, खराब सड़कें, रोजगार की कमी, उद्योगों का पलायन, नशे की समस्या और बंद सीसीटीवी कैमरों को लेकर विपक्ष सत्ताधारी आम आदमी पार्टी को घेरने की तैयारी में है। आम आदमी पार्टी के विधायक ब्रह्म शंकर जिंपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मजबूत गढ़ में सेंध लगाकर जीत दर्ज की थी। अब 2027 में उनके सामने अपनी पिछली जीत को दोहराने की चुनौती होगी। इस बार मतदाता उनके पांच साल के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों और स्थानीय समस्याओं के समाधान को भी चुनावी कसौटी पर परख सकते हैं। बरसात के दौरान शहर के कई इलाकों में जलभराव की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। स्थानीय लोगों की मांग है कि पानी की निकासी के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि हर बारिश में सड़कों और बाजारों में जलभराव की स्थिति न बने। यह मुद्दा आगामी चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए अहम हो सकता है। सड़कों की खराब हालत भी लोगों की नाराजगी का कारण बनी हुई है। होशियारपुर-जालंधर, होशियारपुर-चिंतपूर्णी और होशियारपुर-ऊना मार्गों की स्थिति को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क सड़कों के सुधार की मांग भी लगातार सामने आती रही है। रोजगार और उद्योगों का मुद्दा भी चुनाव में प्रभाव डाल सकता है। क्षेत्र में बड़े औद्योगिक या रोजगार पैदा करने वाले प्रोजेक्ट नहीं आने और स्थानीय उद्योगों के सामने खड़ी चुनौतियों को लेकर विपक्ष सरकार पर निशाना साध सकता है। उद्योगों के पलायन को रोकने और छोटे उद्योगों को सरकारी सहायता देने की मांग भी उठ रही है। सुरक्षा और नशे की समस्या भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बनने की संभावना है। शहर के कई स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों के बंद होने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष इन मुद्दों को कानून-व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा से जोड़कर सरकार को घेर सकता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में ब्रह्म शंकर जिंपा ने 51,112 वोट हासिल किए थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी सुंदर शाम अरोड़ा को 13,859 वोटों के अंतर से हराया था। अरोड़ा को 37,253 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के तीक्ष्ण सूद को 23,973 और बसपा के वीरेंद्र सिंह परिहार को 12,087 वोट हासिल हुए थे।

ब्रह्म शंकर जिंपा लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे और कई बार नगर पार्षद भी चुने गए। कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। इसके बाद आम आदमी पार्टी ने 2022 में उन्हें विधानसभा चुनाव का टिकट दिया, जहां उन्होंने जीत दर्ज कर राजनीतिक समीकरण बदल दिए। होशियारपुर सीट के पिछले पांच विधानसभा चुनावों का रिकॉर्ड भी दिलचस्प रहा है। 2002 और 2007 में भाजपा ने जीत हासिल की, जबकि 2012 और 2017 में कांग्रेस प्रत्याशी विजयी रहे। 2022 में आम आदमी पार्टी ने पहली बार इस सीट पर कब्जा किया। अब 2027 में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि 2022 में जिंपा को मिले 51 हजार से अधिक वोटों में आम आदमी पार्टी की उस समय की चुनावी लहर का कितना प्रभाव था और उनका व्यक्तिगत जनाधार कितना मजबूत है। इस बार स्थानीय मुद्दों पर मतदाताओं का रुख उनकी चुनावी स्थिति को काफी प्रभावित कर सकता है। ग्रामीण इलाकों में सड़क और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल प्रमुख हैं। किसान सुखबीर सिंह का कहना है कि गांवों की संपर्क सड़कों की हालत में सुधार जरूरी है। उनके मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को चुनाव में गंभीरता से उठाया जाना चाहिए। शहर निवासी अधिवक्ता अक्षय पराशर ने जलभराव की समस्या को गंभीर बताया। उनका कहना है कि बारिश के दौरान कई इलाकों में पानी जमा हो जाता है। उन्होंने शिमला पहाड़ी में करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित बदलाव नहीं दिखने की बात कही। उद्योगपति उमेश जैन के अनुसार लघु, कुटीर और माइक्रो उद्योगों को अपेक्षित सरकारी सहयोग नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि कई इकाइयां मुश्किल दौर से गुजर रही हैं और स्थानीय उद्योगों को बचाने के लिए विशेष पैकेज की जरूरत है। विकास कार्यों को लेकर विधायक ब्रह्म शंकर जिंपा और पूर्व विधायक सुंदर शाम अरोड़ा के बीच भी सियासी आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। जिंपा अपने पांच साल के कार्यकाल को विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण बताते हुए कई लंबित परियोजनाओं के पूरा होने का दावा कर रहे हैं। जिंपा के मुताबिक उनके कार्यकाल में वर्षों से लंबित पांच पुलों का निर्माण कराया गया। इसके अलावा नया तहसील परिसर और 46 गांवों में सड़कों के निर्माण को भी वह अपनी प्रमुख उपलब्धियों में गिना रहे हैं। शहर में कूड़े के डंप हटाने का काम भी उनके द्वारा किए गए कार्यों में शामिल बताया गया है।

वहीं पूर्व विधायक सुंदर श्याम अरोड़ा मौजूदा सरकार के विकास दावों पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि पिछली सरकार के समय स्वीकृत और जिन परियोजनाओं के लिए फंड जारी हो चुका था, उन्हीं कामों को मौजूदा सरकार अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है। जिंपा ने अरोड़ा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में कई वर्षों से लंबित काम पूरे किए गए हैं। उन्होंने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि जो लोग अपने कार्यकाल में विकास के नाम पर निष्क्रिय रहे, उन्हें अब विकास कार्यों पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है। 2027 के चुनाव में होशियारपुर विधानसभा क्षेत्र का मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि स्थानीय मुद्दों और विकास के दावों के बीच भी दिखाई दे सकता है। आने वाले समय में विपक्ष की रणनीति, नए उम्मीदवारों की दावेदारी और मतदाताओं की प्राथमिकताएं इस सीट के चुनावी समीकरण को और दिलचस्प बना सकती हैं।

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