वार्डों का बदलेगा भूगोल, हरियाणा के 46 नगर निकायों में परिसीमन की प्रक्रिया शुरू

हरियाणा में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच राज्य सरकार ने 46 नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में नए सिरे से वार्डों का परिसीमन कराने का फैसला लिया है। सरकार ने इसके लिए एडहॉक समितियों का गठन कर दिया है। इन समितियों के जरिए संबंधित नगर निकायों में वार्डों की सीमाओं और दायरे को नए सिरे से तय किया जाएगा। जारी आदेशों के मुताबिक, संबंधित जिले के उपायुक्त या उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि को एडहॉक समिति में सदस्य बनाया गया है। समितियां अपने-अपने निकायों में परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगी। इस प्रक्रिया के तहत नगर निकायों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाएगा। साथ ही आबादी के आधार पर वार्डों की सीमाएं तय करने और नए वार्डों का सीमांकन करने का काम किया जाएगा। सरकार के इस फैसले का सीधा असर आगामी शहरी निकाय चुनावों पर पड़ सकता है। वार्डों का भूगोल बदलने के साथ कई इलाकों की राजनीतिक स्थिति और चुनावी समीकरण भी बदल सकते हैं। जिन 46 नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में वार्डबंदी की प्रक्रिया होगी, उनमें चरखी दादरी, फतेहाबाद, टोहाना, सोहना, हांसी, बहादुरगढ़ और जींद जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। इसके अलावा नरवाना, कैथल, नारनौल, पलवल, नूंह, भिवानी, गोहाना, कालका, झज्जर और समालखा में भी नए सिरे से वार्डों का परिसीमन किया जाएगा। बरवाला, रतिया, सफीदों, उचाना, घरौंडा, असंध, शाहाबाद, पिहोवा, महेंद्रगढ़ और पुन्हाना भी इस प्रक्रिया के दायरे में हैं। वहीं बावल, महम, ऐलनाबाद, रानियां और गन्नौर समेत अन्य संबंधित नगर निकायों में भी वार्डों की सीमाओं को नए सिरे से तय किया जाएगा।
परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन निकायों में नए वार्डों के आधार पर मतदाता सूचियों को तैयार या संशोधित किया जाएगा। इसके बाद वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया भी नए परिसीमन के आधार पर आगे बढ़ेगी। वार्डों की सीमाएं बदलने से कई मौजूदा वार्डों का स्वरूप बदल सकता है। कुछ इलाकों को नए वार्डों में शामिल किया जा सकता है, जबकि कुछ वार्डों का क्षेत्र नए सिरे से निर्धारित किया जा सकता है। इसका असर संभावित उम्मीदवारों की चुनावी रणनीति पर भी पड़ेगा। जिन नेताओं ने मौजूदा वार्डों के आधार पर अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की है, उन्हें नई वार्डबंदी के बाद अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। राजनीतिक दल भी परिसीमन की प्रक्रिया पर नजर रखेंगे, क्योंकि नए वार्ड बनने और सीमाएं बदलने से स्थानीय स्तर पर चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। हरियाणा में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले सरकार का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि परिसीमन के बाद मतदाता सूची, वार्ड आरक्षण और उम्मीदवारों की चुनावी रणनीति—तीनों पर इसका असर पड़ सकता है। अब इन 46 नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में परिसीमन की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है और नए वार्डों का स्वरूप क्या रहता है, इस पर राजनीतिक दलों और स्थानीय नेताओं की नजर रहेगी।



