हरियाणा

नारनौल में लंपी वायरस से दुधारू गाय की मौत, 97 पशु संक्रमण की चपेट में

हरियाणा में करीब 15 दिन पहले दस्तक देने वाले लंपी स्किन डिजीज ने अब चिंता बढ़ानी शुरू कर दी है। राज्य में इस संक्रमण से पहली पशु मौत का मामला सामने आया है। नारनौल के पास गांव हुडीना में करीब 15 लीटर दूध देने वाली एक दुधारू गाय की लंपी संक्रमण की चपेट में आने के बाद मौत हो गई। गाय की इलाज के दौरान रात में मौत हुई। इस घटना के बाद आसपास के पशुपालकों में चिंता बढ़ गई है। पशुपालन विभाग ने भी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। पीड़ित पशुपालक जिले सिंह के मुताबिक, उनकी गाय का इलाज चल रहा था, लेकिन रात के समय उसकी हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। उनकी एक दूसरी गाय भी लंपी बीमारी से गंभीर रूप से संक्रमित बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, हरियाणा में अब तक लंपी वायरस के 100 से ज्यादा एक्टिव मामले सामने आ चुके हैं। इनमें अकेले नारनौल जिले में करीब 97 पशु संक्रमित बताए जा रहे हैं। महेंद्रगढ़ जिले की भौगोलिक स्थिति भी संक्रमण के लिहाज से चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। जिला तीन तरफ से राजस्थान की सीमा से घिरा है, जिससे संक्रमित पशुओं की आवाजाही और खरीद-फरोख्त के जरिए बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है। विभाग की ओर से सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। संक्रमित पशुओं की पहचान कर उन्हें अन्य स्वस्थ पशुओं से अलग रखने पर जोर दिया जा रहा है। नारनौल के अलावा भिवानी जिले के बहल क्षेत्र और आसपास के गांवों में भी लंपी स्किन डिजीज के नए मामले सामने आने की जानकारी है। इससे पशुपालकों की चिंता और बढ़ गई है।

पशु चिकित्सा विभाग के चिकित्सकों के अनुसार, लंपी संक्रमण की स्थिति में पशुओं को तेज बुखार हो सकता है। इसके अलावा शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर गांठें और घाव दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर पशुपालकों को पशु का तुरंत उपचार करवाने की सलाह दी गई है। बीमारी को फैलने से रोकने के लिए संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना बेहद जरूरी बताया जा रहा है। विभाग ने मक्खी और मच्छरों से बचाव के लिए भी जरूरी इंतजाम करने की सलाह दी है। पशुओं के आसपास साफ-सफाई रखने और संक्रमण की स्थिति में लापरवाही न बरतने पर जोर दिया गया है। लंपी बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए पशुपालन विभाग ने बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान भी शुरू किया है। खास तौर पर उन इलाकों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जहां संक्रमण के मामले सामने आए हैं।

पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे पशुओं में बुखार, शरीर पर गांठ या घाव जैसे लक्षण दिखाई देने पर खुद से इलाज करने के बजाय नजदीकी पशु अस्पताल या पशु चिकित्सक से संपर्क करें। विभाग की कोशिश है कि संक्रमित पशुओं की पहचान जल्द से जल्द कर संक्रमण की चेन को तोड़ा जाए। इसके लिए प्रभावित गांवों और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी लगातार बढ़ाई जा रही है। फिलहाल लंपी संक्रमण को लेकर प्रशासन और पशुपालन विभाग सतर्क है। पहली मौत सामने आने के बाद पशुपालकों के लिए जरूरी है कि वे अपने पशुओं की नियमित निगरानी करें और किसी भी संदिग्ध लक्षण को नजरअंदाज न करें।

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