हल्द्वानी जेल पहुंचीं बहनें, भाइयों को राखी बांधकर की लंबी उम्र की कामना

हल्द्वानी:- रक्षाबंधन के पावन पर्व पर हल्द्वानी में भाई-बहन के रिश्ते की एक बेहद भावुक तस्वीर सामने आई। जेल में बंद भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए बड़ी संख्या में बहनें जेल पहुंचीं। किसी बहन ने भाई की लंबी उम्र की दुआ की तो किसी ने अगले रक्षाबंधन पर परिवार के साथ घर में त्योहार मनाने की उम्मीद जताई। जेल परिसर में भाइयों से मुलाकात के दौरान कई बहनें भावुक हो गईं। भाई को सामने देखते ही उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। इसके बाद उन्होंने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उनके सुखद भविष्य की कामना की।
सलाखों के पीछे भाइयों तक राखी लेकर पहुंचीं बहनें
रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और आपसी रिश्ते का पर्व है। आमतौर पर बहनें अपने घर पर भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी सुरक्षा का संकल्प लेते हैं। लेकिन हल्द्वानी में इस बार कुछ बहनों ने यह पर्व जेल में मनाया। जिन भाइयों की कलाई पर हर साल घर में बहनें राखी बांधती थीं, वे इस बार जेल में हैं। ऐसे में बहनें राखी लेकर जेल पहुंचीं और मुलाकात के दौरान अपने भाइयों को राखी बांधी।
राखी बांधते समय छलके बहनों के आंसू
जेल में रक्षाबंधन के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा। किसी बहन के चेहरे पर भाई से मिलने की खुशी थी तो किसी की आंखों में अपनों से दूर रहने का दर्द नजर आया। भाइयों की कलाई पर राखी बांधते हुए कई बहनों की आंखें नम हो गईं। उन्होंने भाइयों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य की कामना की। साथ ही उम्मीद जताई कि अगली बार रक्षाबंधन का पर्व जेल में नहीं, बल्कि पूरे परिवार के साथ घर पर मनाने का मौका मिलेगा।
‘भाई किसी भी परिस्थिति में हो, रिश्ता हमेशा खास’
जेल पहुंचे परिजनों का कहना था कि भाई चाहे किसी भी परिस्थिति में हो, बहन के लिए उसका रिश्ता और प्रेम हमेशा महत्वपूर्ण रहता है। इसी भाव के साथ बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए जेल पहुंचीं। कई बहनों के लिए अपने भाई से मिलना और उसे राखी बांधना इस दिन की सबसे बड़ी भावनात्मक इच्छा थी।
कानूनी सहायता की भी लगाई गुहार
कुछ परिजनों ने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से अपने भाइयों के मामलों में नियमानुसार आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि यदि कानूनी प्रक्रिया के तहत किसी तरह की सहायता या आगे की कार्रवाई संभव है तो उन्हें उसका लाभ मिलना चाहिए। रक्षाबंधन के मौके पर जेल में हुई इन मुलाकातों ने भाई-बहन के रिश्ते की उस भावना को सामने रखा, जिसमें मुश्किल परिस्थितियां भी परिवार के प्रेम और अपनापन को कम नहीं कर पातीं।




