हरियाणा

खेलों का पावर हाउस बना हरियाणा, फिर दिखाया दम – Parvat Sankalp News


हरियाणा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि खेलों में सफलता केवल बड़ी आबादी या अधिक संसाधनों से नहीं, बल्कि मजबूत खेल नीति, बेहतर प्रशिक्षण और खिलाड़ियों के समर्पण से हासिल होती है। देश की कुल आबादी में लगभग दो प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला हरियाणा लगातार अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत के लिए सबसे अधिक पदक जीतने वाले राज्यों में शामिल है। ओलंपिक, पैरालिंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और विश्व चैंपियनशिप में हरियाणा के खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार देश का गौरव बढ़ा रहा है, यही वजह है कि आज प्रदेश को “भारत का स्पोर्ट्स पावर हाउस” कहा जाता है। हाल ही में संपन्न राष्ट्रमंडल खेलों में भी हरियाणा के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को मिले 39 पदकों में से 11 पदक अपने नाम किए। सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि भारत के कुल 13 स्वर्ण पदकों में से सात स्वर्ण पदक अकेले हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते। भिवानी की बेटियों ने पांच गोल्ड मेडल जीतकर पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया और एक बार फिर यह साबित कर दिया कि हरियाणा की बेटियां किसी से कम नहीं हैं। भिवानी को देश की मुक्केबाजी की राजधानी माना जाता है और इस बार भी यहां के खिलाड़ियों ने अपनी पहचान को मजबूत किया। सचिन सिवाच, साक्षी चौधरी ढांडा, प्रीति पंवार, प्रिया घणघस और जैस्मीन लांबोरिया ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वहीं हिसार के अंकुश पंघाल ने भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि नरेंद्र बेरवाल ने रजत पदक जीतकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया। एथलेटिक्स और पैरा स्पर्धाओं में भी हरियाणा के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। झज्जर की शर्मीला ने स्वर्ण, नीरज चोपड़ा ने रजत तथा यशवीर और सीमा ने कांस्य पदक जीतकर भारत की झोली में महत्वपूर्ण पदक डाले।

इस बार पदकों की संख्या पहले की तुलना में कम जरूर रही, लेकिन इसकी बड़ी वजह कई प्रमुख खेलों का राष्ट्रमंडल खेलों से बाहर होना था। कुश्ती, हॉकी, निशानेबाजी, क्रिकेट, बैडमिंटन और कई अन्य खेल शामिल नहीं किए गए, जिनमें हरियाणा के खिलाड़ियों का हमेशा दबदबा रहा है। इसके बावजूद 11 पदक जीतना प्रदेश की मजबूत खेल संस्कृति और खिलाड़ियों की प्रतिभा का प्रमाण माना जा रहा है। हरियाणा की सफलता के पीछे राज्य सरकार की प्रभावी खेल नीति को भी बड़ा कारण माना जाता है। खिलाड़ियों को करोड़ों रुपये की पुरस्कार राशि, सरकारी नौकरियां, छात्रवृत्ति, आधुनिक प्रशिक्षण, खेल नर्सरियां, मेडिकल सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश में दो हजार से अधिक खेल नर्सरियां भविष्य के खिलाड़ियों को तैयार कर रही हैं। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2036 के ओलंपिक में भारत के लिए अधिक से अधिक पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को तैयार करना है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हरियाणा इसी तरह खिलाड़ियों को सुविधाएं और प्रोत्साहन देता रहा, तो आने वाले वर्षों में यह मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणा बना रहेगा।




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