मोहन भागवत के कार्यक्रम पर विपक्ष का हमला, संसद से सड़क तक बयानबाजी

राष्ट्रीय राजनीति में शुक्रवार को उस समय बयानबाजी तेज हो गई जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत की हालिया युवा संवाद बैठक पर प्रतिक्रिया दी। संसद परिसर के बाहर पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को किसी से भी प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता नहीं है। उनका यह बयान उस कार्यक्रम के बाद आया जिसमें मोहन भागवत ने मुंबई स्थित नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र (NMACC) में जेन Z और जेन अल्फा के युवाओं के साथ संवाद किया था। प्रियंका गांधी ने कहा कि भारत का युवा अपनी मेहनत, क्षमता और उपलब्धियों के आधार पर आगे बढ़ रहा है और उसे किसी संगठन या व्यक्ति से मान्यता लेने की जरूरत नहीं है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई और विपक्ष तथा भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। कर्नाटक सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए आरएसएस और भाजपा की विचारधारा पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि आरएसएस और भाजपा अपनी भाषा और शब्दावली बदल सकते हैं, लेकिन उनकी मूल विचारधारा नहीं बदली है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को भ्रमित करने और समाज में विभाजन पैदा करने की राजनीति जारी है।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद राम गोपाल यादव ने भी इस मुद्दे पर भाजपा की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब भी भाजपा राजनीतिक दबाव या चुनौतियों का सामना करती है, तब वह आरएसएस नेतृत्व की ओर रुख करती है। उनका दावा था कि युवाओं के बीच बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए भाजपा अब आरएसएस के माध्यम से संवाद स्थापित करने की कोशिश कर रही है। उधर, मोहन भागवत के कार्यक्रम को लेकर भाजपा या आरएसएस की ओर से विपक्ष के इन बयानों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं को केंद्र में रखकर शुरू हुई यह बहस आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का एक अहम मुद्दा बन सकती है, क्योंकि विभिन्न दल युवाओं तक अपनी पहुंच मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।




