राष्ट्रीय

संसद के मानसून सत्र से पहले प्रधानमंत्री का सकारात्मक संदेश

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए सभी सांसदों से जनहित के मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण मंच है और यहां होने वाली रचनात्मक बहस देश के विकास की दिशा तय करती है। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि इस बार का मानसून सत्र पूरी तरह उत्पादक रहेगा और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरेगा। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने मानसून और संसद सत्र की तुलना करते हुए कहा कि जिस तरह सक्रिय मानसून किसानों, अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन के लिए लाभदायक होता है, उसी तरह यदि संसद का मानसून सत्र भी सक्रिय और रचनात्मक रहेगा तो उसका लाभ पूरे देश को मिलेगा। उन्होंने कहा, “मानसून हो या मानसून सत्र, अगर दोनों ही प्रोएक्टिव हों तो बहुत ही प्रोडक्टिव होते हैं। दोनों प्रोडक्टिव होंगे तो देश का कल्याण होगा, जीव मात्र का कल्याण होगा। इसलिए हमारी यही प्रार्थना है कि मानसून भी प्रोएक्टिव रहे और मानसून सत्र भी प्रोडक्टिव रहे।” प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद में होने वाली चर्चाएं केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनका उद्देश्य देशहित, विकास और जनता से जुड़े मुद्दों का समाधान निकालना होना चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग करें।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में युवाओं का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा किए गए सुधारों ने देश के युवाओं में नया आत्मविश्वास पैदा किया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में लागू किए गए सुधारों के कारण युवाओं को नए अवसर मिले हैं और उनमें बड़े सपने देखने तथा उन्हें पूरा करने का साहस बढ़ा है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि देश का युवा वर्ग नवाचार, स्टार्टअप, तकनीक, शिक्षा और उद्यमिता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार ऐसी नीतियां बना रही है जो युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर दें और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने अंत में उम्मीद जताई कि संसद का मानसून सत्र सकारात्मक माहौल में चलेगा और सभी दल मिलकर ऐसे फैसले लेंगे, जिनसे देश के विकास को गति मिले, लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती मिले और आम जनता के हित सर्वोपरि रहें।

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