उत्तराखंड

नियमित नियुक्ति तक संविदा कर्मियों को न हटाने का आदेश, फिर भी सेवा समाप्त; हाईकोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण

नैनीताल:- उत्तराखंड के तकनीकी विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध कॉलेजों में संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश का पालन नहीं होने पर तकनीकी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के रजिस्ट्रारों के रवैये पर नाराजगी जताई है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि पहले ही आदेश दिया जा चुका है कि जब तक संबंधित पदों पर नियमित नियुक्तियां नहीं हो जातीं, तब तक वहां काम कर रहे संविदा कर्मचारियों को सेवामुक्त नहीं किया जाए। इसके बावजूद कर्मचारियों की सेवा समाप्त किए जाने पर कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।

कोर्ट ने रजिस्ट्रारों से मांगा जवाब

शुक्रवार को मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तकनीकी कॉलेजों के रजिस्ट्रारों से कहा कि वे आने वाले मंगलवार तक शपथपत्र के माध्यम से अदालत को बताएं कि पूर्व आदेश का अनुपालन क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी चाहें तो शपथपत्र दाखिल कर अपना पक्ष रख सकते हैं या फिर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर यह स्पष्टीकरण दे सकते हैं कि कोर्ट के आदेश के बावजूद संविदा कर्मचारियों को कैसे हटाया गया। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त, मंगलवार को होगी।

नियमित नियुक्ति तक कर्मचारियों को हटाने पर रोक का था आदेश

मामले में पहले हाईकोर्ट की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जिन पदों पर संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं, उन पदों पर नियमित नियुक्ति होने तक मौजूदा कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त नहीं की जाएंगी। कोर्ट ने यह भी कहा था कि जिन पदों पर ये संविदा कर्मचारी काम कर रहे हैं, वहां दूसरे संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की जा सकती। अब कोर्ट के सामने सवाल यह है कि जब कर्मचारियों को नियमित नियुक्ति होने तक हटाने से रोकने का आदेश मौजूद था, तो संबंधित कर्मचारियों का अनुबंध समाप्त होने के बाद उन्हें सेवा से बाहर कैसे किया गया। इसी बिंदु पर कोर्ट ने संबंधित रजिस्ट्रारों से स्पष्टीकरण मांगा है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला गौरव सेमवाल समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने नैनीताल हाईकोर्ट में संविदा कर्मचारियों की सेवा और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार की ओर से कर्मचारियों के नियमितीकरण से संबंधित शासनादेश जारी किया गया था। इसके बाद तकनीकी विभाग की ओर से भी संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को संविदा कर्मचारियों की सेवा अवधि बढ़ाए जाने की जानकारी दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इसके बावजूद संबंधित विश्वविद्यालय की ओर से अलग प्रक्रिया अपनाते हुए संविदा पदों पर कार्यरत कर्मचारियों का अनुबंध समाप्त कर नए सिरे से भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिया गया।

विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि यदि संविदा कर्मचारियों को नियमित नियुक्ति होने तक सेवा में बनाए रखने का न्यायालय का आदेश है, तो उसी पद पर नए लोगों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी करना कोर्ट के आदेश की भावना के विपरीत है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि जब तक संबंधित पदों पर नियमित नियुक्तियां नहीं हो जातीं, तब तक तकनीकी विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध कॉलेजों में उन पदों पर नए संविदा या तदर्थ कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की जाए। अब हाईकोर्ट इसी मामले में पूर्व आदेश के अनुपालन को लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांग रहा है।

रजिस्ट्रारों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का विकल्प

कोर्ट ने संबंधित तकनीकी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के रजिस्ट्रारों को निर्देश दिया है कि वे शपथपत्र दाखिल कर बताएं कि अदालत के आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ। यदि वे शपथपत्र के माध्यम से जवाब नहीं देते हैं तो उन्हें अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इस निर्देश के बाद अब तकनीकी विश्वविद्यालयों में संविदा कर्मचारियों की सेवा और नई भर्ती से जुड़ा विवाद एक बार फिर हाईकोर्ट के केंद्र में आ गया है।

4 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई मंगलवार 4 अगस्त को प्रस्तावित है। उस दिन कोर्ट के सामने संबंधित रजिस्ट्रारों की ओर से दाखिल किए गए जवाब और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों पर सुनवाई होगी। अब देखना होगा कि संबंधित तकनीकी विश्वविद्यालय कोर्ट के पूर्व आदेश का पालन नहीं होने को लेकर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और अदालत इस मामले में आगे क्या निर्देश जारी करती है।

एक नजर में मामला

  • मामला: तकनीकी विश्वविद्यालयों में संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्ति
  • कोर्ट: नैनीताल हाईकोर्ट
  • याचिकाकर्ता: गौरव सेमवाल समेत अन्य
  • मुख्य मुद्दा: नियमित नियुक्ति होने तक संविदा कर्मचारियों को सेवा में रखने का आदेश
  • कोर्ट की कार्रवाई: रजिस्ट्रारों से जवाब तलब
  • जवाब की समयसीमा: मंगलवार तक
  • अगली सुनवाई: 4 अगस्त
  • मुख्य पीठ: मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय

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