उत्तराखंड

उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता पर बड़ा अपडेट, छात्रों के भविष्य को लेकर सरकार गंभीर

हरिद्वार: उत्तराखंड सरकार ने राज्य में मदरसों की मान्यता प्रक्रिया को तेज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि बिना वैध मान्यता के किसी भी मदरसे का संचालन स्वीकार नहीं किया जाएगा। एक जुलाई को उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के भंग होने के बाद राज्य सरकार ने मदरसों को नई व्यवस्था के तहत लाने के लिए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है। अब सभी मदरसों को शिक्षा विभाग के माध्यम से पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि हरिद्वार जिले में इस प्रक्रिया की रफ्तार अभी भी काफी धीमी दिखाई दे रही है। जिले में संचालित कुल 271 मदरसों में से केवल 47 मदरसों ने अब तक पंजीकरण के लिए आवेदन किया है, जिससे प्रशासन ने चिंता जताई है।

मदरसा संचालकों के साथ हुई अहम बैठक

इस स्थिति को देखते हुए हरिद्वार के रोशनाबाद स्थित जिला कार्यालय सभागार में उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारी, संबंधित विभागों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में मदरसा संचालक शामिल हुए। बैठक के दौरान सरकार की नई नीति, पंजीकरण प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही मदरसा संचालकों से जल्द से जल्द आवेदन करने की अपील की गई।

सरकार का स्पष्ट संदेश

बैठक को संबोधित करते हुए प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य मदरसों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक एवं मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है। इसके लिए सभी मदरसों का शिक्षा विभाग के अंतर्गत पंजीकरण आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई मदरसा निर्धारित समय के भीतर पंजीकरण नहीं कराता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

पारदर्शी और व्यवस्थित होगी पूरी व्यवस्था

डॉ. गांधी ने कहा कि नई व्यवस्था लागू होने से मदरसों की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और विद्यार्थियों को सरकारी मानकों के अनुरूप बेहतर शैक्षणिक अवसर मिल सकेंगे। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी मदरसा संचालकों से समन्वय स्थापित कर उन्हें मान्यता प्रक्रिया की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए ताकि समय सीमा के भीतर सभी पात्र संस्थानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जा सके।

बंद मदरसों के छात्रों के भविष्य पर भी सरकार का फोकस

बैठक में यह भी कहा गया कि जिन मदरसों का संचालन बंद हो चुका है, वहां पढ़ रहे विद्यार्थियों का प्रवेश निकटवर्ती सरकारी विद्यालयों में कराया जाए ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। साथ ही प्रशासन ने दोहराया कि बिना मान्यता किसी भी प्रकार की शैक्षणिक गतिविधि संचालित करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और ऐसे संस्थानों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हरिद्वार में आवेदन की वर्तमान स्थिति

जिला माध्यमिक शिक्षा अधिकारी अभिषेक शुक्ला के अनुसार हरिद्वार में कुल 271 मदरसे संचालित हैं।

  • 47 मदरसों ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया।
  • 5 मदरसों को मान्यता मिल चुकी है।
  • 18 आवेदनों पर 29 जुलाई को विचार किया जाएगा।
  • 24 आवेदनों का निरीक्षण और प्रक्रिया जारी है।
  • मानकों को पूरा करने के बाद ही अंतिम मान्यता प्रदान की जाएगी।

मुस्लिम समाज से भी मिला समर्थन

मुस्लिम समाजसेवी एवं मदरसा संचालक हाफिज राहीबदुल्ला ने कहा कि धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा भी समय की आवश्यकता है। उन्होंने सभी मदरसा संचालकों से सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करने और उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के साथ पंजीकरण कराने की अपील की।

क्या है सरकार का उद्देश्य?

राज्य सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का मकसद मदरसों को बंद करना नहीं बल्कि उन्हें एक पारदर्शी, व्यवस्थित और आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ना है, ताकि छात्रों को धार्मिक शिक्षा के साथ बेहतर शैक्षणिक अवसर भी मिल सकें। इसके लिए सभी मदरसों का समय पर पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।

 

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