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सरकार लाई परीक्षा संशोधन विधेयक, विपक्ष ने नहीं चलने दिया सदन

18वीं लोकसभा के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को भी सदन में विपक्ष का हंगामा जारी रहा, जिसके कारण लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन के चलते सदन को तीन बार स्थगित करना पड़ा। सरकार की ओर से सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया गया, लेकिन लगातार जारी शोर-शराबे के कारण इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी। कार्यवाही के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को सदन के पटल पर रखा। सरकार का कहना है कि यह विधेयक देश की परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने की दिशा में अहम कदम है। हालांकि विपक्ष के विरोध के कारण सदन का माहौल लगातार तनावपूर्ण बना रहा। दोपहर 12 बजे के बाद जब लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो विपक्षी सांसद 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। कई सांसद अपनी सीटों से उठकर वेल तक पहुंच गए, जिससे सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों से बार-बार अपील करते हुए कहा कि यह विधेयक देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य, उनकी मेहनत और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि विरोध दर्ज कराने के बजाय सदन में चर्चा के माध्यम से अपने विचार रखें। अध्यक्ष ने यह भी कहा कि सभी सांसदों को छह घंटे या उससे अधिक समय तक अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा, क्योंकि लोकतंत्र में बहस और संवाद ही सबसे प्रभावी माध्यम है। इसके बावजूद विपक्षी सांसदों ने अपना विरोध जारी रखा और लगातार नारेबाजी करते रहे। सदन में बढ़ते हंगामे के कारण कार्यवाही कई बार रोकनी पड़ी। आखिरकार लगातार व्यवधान के चलते लोकसभा अध्यक्ष ने बैठक को मंगलवार, 28 जुलाई सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनुचित गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाने के लिए यह संशोधन विधेयक बेहद महत्वपूर्ण है। वहीं विपक्ष परीक्षा प्रणाली, छात्रों के मुद्दों और हालिया घटनाओं पर सरकार से जवाब मांगने की अपनी मांग पर अड़ा रहा। ऐसे में मानसून सत्र का एक और दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया और सदन में कोई ठोस विधायी चर्चा नहीं हो सकी।

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