पंजाब सरकार केंद्र की तरह महंगाई भत्ता (DA) बढ़ाने के लिए बाध्य नहीं, वित्तीय स्थिति के आधार पर होगा फैसला

पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को बताया है कि राज्य मंत्रिमंडल केंद्र सरकार द्वारा घोषित महंगाई भत्ता (Dearness Allowance-DA) और महंगाई राहत (Dearness Relief-DR) की बढ़ोतरी को उसी दर और समय पर लागू करने के लिए बाध्य नहीं है।सरकार ने अपने जवाब में कहा कि DA और DR की किस्तें जारी करना राज्य सरकार का नीतिगत निर्णय है, जिसे समय-समय पर राज्य की वित्तीय स्थिति का आकलन करने के बाद लिया जाता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने केवल यह निर्णय लिया था कि वह संभव होने पर (may endeavour) केंद्र सरकार के अनुरूप DA बढ़ोतरी लागू करने का प्रयास करेगी।
यह मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 1 जुलाई 2023 से लागू होने वाली DA की किस्तें अब तक राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जारी नहीं की गई हैं, जबकि पंजाब में कार्यरत IAS, IPS, IFS अधिकारियों तथा न्यायिक अधिकारियों को केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तर्ज पर समय पर DA का लाभ मिलता रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य के अन्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के साथ भेदभाव (Hostile Discrimination) किया जा रहा है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने 11 मार्च को पंजाब सरकार से विस्तृत जवाब मांगा था।
हाईकोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा था कि केंद्र सरकार के पैटर्न के अनुसार कार्यरत अखिल भारतीय सेवा (All India Services) के अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों को DA की किस्तें किस तारीख से दी गईं, इसकी पूरी जानकारी प्रस्तुत की जाए। इस पर पंजाब सरकार की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) ने शपथपत्र (Affidavit) दाखिल किया। सरकार ने अदालत को बताया कि 18 जून 2021 के कैबिनेट मेमोरेंडम के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 में वेतन और पेंशन पर लगभग 39,481 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था। वहीं 1 जनवरी 2016 से 30 जून 2021 तक संशोधित वेतनमान और पेंशन से संबंधित बकाया राशि (Arrears) का अनुमान लगभग 13,759 करोड़ रुपये लगाया गया था।
सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद 18 फरवरी 2025 को बकाया भुगतान के लिए एक व्यवस्थित भुगतान योजना (Systematic Liquidation Plan) लागू की गई। इसके तहत संशोधित वेतन, पेंशन, पारिवारिक पेंशन, DA/DR तथा अवकाश नकदीकरण (Leave Encashment) सहित सभी बकाया भुगतान पर कुल लगभग 14,191 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आने का अनुमान है।




