पंजाब में बाढ़ रोकने के लिए पहली बार जियोट्यूब तकनीक का इस्तेमाल

पंजाब सरकार ने बाढ़ नियंत्रण और नदी किनारों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। राज्य में पहली बार जियोट्यूब तकनीक का इस्तेमाल कर दरियाओं (नदियों) के किनारों और बांधों को मजबूत बनाया जा रहा है। इस नई तकनीक का उद्देश्य सतलुज, रावी और ब्यास जैसी नदियों में आने वाली बाढ़ के दौरान होने वाले कटाव और भारी नुकसान को रोकना है।
साल 2025 में आई विनाशकारी बाढ़ ने पंजाब के कई जिलों में भारी तबाही मचाई थी। नदी किनारों के टूटने से हजारों गांव प्रभावित हुए, खेती योग्य भूमि बह गई, पशुधन का नुकसान हुआ और लोगों को बड़े पैमाने पर आर्थिक क्षति झेलनी पड़ी। इसी अनुभव से सबक लेते हुए पंजाब सरकार ने बाढ़ प्रबंधन के लिए आधुनिक और टिकाऊ तकनीकों को अपनाने का फैसला किया है।
जल स्रोत विभाग की रिसर्च टीम लगातार उन तकनीकों का अध्ययन कर रही है जिनका उपयोग देश और विदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इसी कड़ी में जियोट्यूब तकनीक को पंजाब में लागू किया जा रहा है। फिलहाल लुधियाना जिले के ससराली क्षेत्र में सतलुज नदी के किनारे करीब एक किलोमीटर लंबे हिस्से पर जियोट्यूब बिछाने का कार्य तेजी से चल रहा है।
अधिकारियों के अनुसार जिन स्थानों पर जियोट्यूब लगाए जा रहे हैं, वे वही क्षेत्र हैं जहां पिछले वर्ष बाढ़ के दौरान नदी का किनारा टूट गया था। इसके कारण आसपास के इलाकों में भारी तबाही हुई थी। सरकार का मानना है कि यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो भविष्य में रावी और ब्यास नदियों के कमजोर तटबंधों और बांधों को भी इसी तकनीक से मजबूत किया जाएगा।
जियोट्यूब पारंपरिक धुस्सी बांधों का आधुनिक विकल्प माने जा रहे हैं। वर्तमान में नदी किनारों पर प्लास्टिक के कट्टों में रेत भरकर अस्थायी बांध तैयार किए जाते हैं, लेकिन तेज बहाव और लंबे समय तक पानी के दबाव के कारण ये बांध कमजोर पड़ जाते हैं और कई बार टूट भी जाते हैं। इसके विपरीत जियोट्यूब अधिक मजबूत, टिकाऊ और लंबे समय तक प्रभावी बने रहते हैं।
करीब 20 मीटर लंबी और 3 मीटर व्यास वाली इन विशाल ट्यूबों को नदी किनारे स्थापित किया जाता है। विशेष तकनीक की मदद से इन्हें नदी के भीतर से ही रेत भरकर तैयार किया जाता है। बाद में इन्हें मिट्टी से ढक दिया जाता है ताकि सूरज की तेज किरणों और मौसम के प्रभाव से इनकी गुणवत्ता प्रभावित न हो।
जियोट्यूब सिंथेटिक पॉलीमर, पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलिएस्टर जैसे उच्च गुणवत्ता वाले पदार्थों से बनाए जाते हैं। ये न केवल हल्के होते हैं बल्कि अत्यधिक मजबूत भी होते हैं। इनमें रसायनों, नमी, एसिड और पानी के लगातार संपर्क को सहन करने की क्षमता होती है। विशेषज्ञों के अनुसार इनकी आयु लगभग 20 से 30 वर्ष तक हो सकती है, जिससे यह बाढ़ नियंत्रण के लिए एक किफायती और टिकाऊ समाधान साबित हो सकते हैं।
पंजाब सरकार को उम्मीद है कि इस तकनीक के सफल प्रयोग से नदी किनारों का कटाव कम होगा, बाढ़ के दौरान तटबंधों की मजबूती बढ़ेगी और हजारों गांवों तथा किसानों की जमीन को सुरक्षित रखा जा सकेगा। यह परियोजना राज्य के बाढ़ प्रबंधन ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखी जा रही है।


