पंजाब

अकाल तख्त साहिब पहुंचे सीएम भगवंत मान, विवादित बयान पर जत्थेदार के सामने रखा पक्ष

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान आज श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश हुए और अपने विवादित बयान को लेकर स्पष्टीकरण दिया। मुख्यमंत्री नंगे पांव हेरिटेज स्ट्रीट से होते हुए श्री हरमंदिर साहिब पहुंचे, जहां उन्होंने पहले मत्था टेका और फिर अकाल तख्त सचिवालय में कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज के सामने अपना पक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने इस दिन को पूरी तरह धार्मिक मर्यादा और सम्मान के नाम समर्पित किया। यह विवाद दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुआ था। 27 दिसंबर को पंजाबी गायक जसबीर जस्सी ने गुरदासपुर में आयोजित एक धार्मिक समागम में शबद कीर्तन किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद इस मुद्दे ने धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का रूप ले लिया।

28 दिसंबर को श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सिख मर्यादा के अनुसार पूर्ण सिख (सबत सूरत) न होने की स्थिति में गुरु ग्रंथ साहिब की हजूरी में शबद कीर्तन नहीं किया जा सकता। इस बयान के बाद धार्मिक हलकों में बहस तेज हो गई। इसके अगले दिन 29 दिसंबर को चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने टिप्पणी की थी कि यदि सहजधारी सिखों को शबद गायन की अनुमति नहीं है, तो फिर उन्हें गुरुद्वारों में मत्था टेकने या गुरु की गोलक में दान देने से भी रोक देना चाहिए। मुख्यमंत्री के इस बयान पर सिख संगठनों और धार्मिक नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे सिख रीति-रिवाजों के विपरीत बताया। इसके बाद 5 जनवरी 2026 को अकाल तख्त सचिवालय ने मुख्यमंत्री को 15 जनवरी को सुबह 10 बजे उपस्थित होने का समन जारी किया। चूंकि मुख्यमंत्री को सिख मर्यादा के अनुसार ‘पटित’ श्रेणी में माना गया, इसलिए उन्हें अकाल तख्त की मुख्य फसील के बजाय सचिवालय में पेश होने के लिए कहा गया। समन मिलने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि वह मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक विनम्र सिख के रूप में नंगे पांव अकाल तख्त साहिब में उपस्थित होंगे और धार्मिक परंपराओं का पूरा सम्मान करेंगे। आज उन्होंने उसी भावना के साथ उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया।

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