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पंजाब: गुरु ग्रंथ साहिब की कॉपियों की चोरी का मामला, पूर्व SGPC ऑडिटर सतिंदर सिंह कोहली अरेस्ट

पंजाब पुलिस ने धार्मिक तौर पर बेहद संवेदनशील रहे गुरु ग्रंथ साहिब की 328 कॉपियों के चोरी के मामले में बड़ा एक्शन लिया है। पुलिस ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के पूर्व इंटरनल ऑडिटर सतिंदर सिंह कोहली को अरेस्ट किया है। कोहली शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल का करीबी भी है। पंजाब में गुरु ग्रंथ साहिब की 328 गायब कॉपियों (बीर) का मामला लंबे समय से चल रही है। गौरतलब को कि 2020 में SGPC ने अपने पूर्व इंटरनल ऑडिटर सतिंदर सिंह कोहली की सेवाएं खत्म कर दी थीं और 75 प्रतिशत पेमेंट वसूलने के लिए कानूनी कार्रवाई को मंजूरी दी थी।


SGPC ने हायर की थी एक फर्म

पंजाब पुलिस के अनुसार कोहली को बुधवार देर रात गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि गुरु ग्रंथ साहिब की गायब कॉपियों के चोरी होने की मामले की जांच जारी है। हाल ही में अमृतसर के कोतवाली पुलिस स्टेशन में एक फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई थी, जिसमें पूर्व SGPC मुख्य सचिव रूप सिंह सहित 16 आरोपियों के नाम थे। कोहली को 2020 में श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश पर SGPC से हटा दिया गया था, जब उनकी कथित लापरवाही का खुलासा हुआ था। जांच रिपोर्ट में पता चला कि 2016 से कोई SGPC ऑडिट नहीं किया गया था, जबकि कोहली की फर्म, SS कोहली एंड एसोसिएट्स (एक प्राइवेट चार्टर्ड अकाउंटेंसी टीम) को 2009 में इंटरनल ऑडिट, अकाउंट कंप्यूटराइजेशन और कंट्रोल सिस्टम के लिए हायर किया गया था।

10 करोड़ रुपये की लगाई चपत
पिछले साल दिसंबर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कोहली के खिलाफ रिकवरी प्रस्तावों को लागू करने में विफल रहने के लिए SGPC की आलोचना की और SAD (बादल) के अध्यक्ष सुखबीर बादल से उनकी नजदीकी पर सवाल उठाया था। वह उस वक्त पर SGPC को कंट्रोल करते थे। जांच में सामने आया है कि फर्म ने चार कामों का बिल बनाकर सिर्फ एक काम किया। कथित तौर पर 11 सालों में SGPC से 10 करोड़ रुपये से ज़्यादा लिए, जिसमें हर महीने 3.5 लाख रुपये का पेमेंट होता था। इस लापरवाही के कारण बीर के कथित गलत इस्तेमाल का पता नहीं चला, जबकि सिख समुदाय से खराब रिकॉर्ड-कीपिंग और रखरखाव के बारे में बार-बार शिकायतें मिल रही थीं। 2020 में SGPC ने कोहली की सेवाएं तुरंत खत्म कर दीं और 75 प्रतिशत पेमेंट वसूलने के लिए कानूनी कार्रवाई को मंजूरी दी।

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