राम वन गमन पथ की सड़क धंसी तो बोले केशव मौर्य- ‘धंसेगी तो बनेगी’, बयान पर मचा घमासान

प्रयागराज: भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी राम वन गमन पथ परियोजना को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे इस मार्ग पर डामरीकरण के कुछ समय बाद ही सड़क के कई हिस्सों में धंसने और निर्माण सामग्री की परतें उखड़ने के आरोप सामने आए हैं। इसी मुद्दे पर जब उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से सवाल किया गया तो उनके जवाब ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।
डामरीकरण के बाद सड़क धंसने पर उठे सवाल
राम वन गमन पथ को श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण परियोजना के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, निर्माण के शुरुआती चरण में ही सड़क के कुछ हिस्सों के खराब होने की शिकायतों ने इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया द्वारा सड़क की स्थिति और निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल पूछे जाने पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, “सड़क धंसेगी तो बनेगी, बनेगी तो धंसेगी।” उनके इस बयान को लेकर अब विपक्ष और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाने वाले लोग सरकार को घेर रहे हैं।
निर्माण गुणवत्ता और PWD की कार्यप्रणाली पर सवाल
सड़क के शुरुआती दौर में ही धंसने की घटना ने लोक निर्माण विभाग (PWD) की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क निर्माण में बेस तैयार करने, उसकी कॉम्पेक्शन और डामर की गुणवत्ता को महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में परियोजना के शुरुआती चरण में सड़क के क्षतिग्रस्त होने से तकनीकी मानकों के पालन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। मामले में तकनीकी जांच, निर्माण एजेंसी की जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, खबर में किसी स्वतंत्र तकनीकी जांच के निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है।
क्या बार-बार मरम्मत पर खर्च होगा सरकारी पैसा?
राम वन गमन पथ की स्थिति को लेकर एक बड़ा सवाल मेंटेनेंस और सरकारी खर्च से जुड़ा है। यदि नई बनी सड़क को बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ती है, तो इससे सरकारी धन के इस्तेमाल और निर्माण की दीर्घकालिक गुणवत्ता पर सवाल उठ सकते हैं। आलोचकों का कहना है कि किसी बड़ी सड़क परियोजना में केवल निर्माण पूरा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी मजबूती और टिकाऊपन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
आस्था से जुड़ी परियोजना होने के कारण बढ़ी संवेदनशीलता
राम वन गमन पथ धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह मार्ग चित्रकूट जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल को जोड़ता है और श्रद्धालुओं की आवाजाही को आसान बनाने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। ऐसे में निर्माण गुणवत्ता को लेकर सामने आने वाली शिकायतें इस परियोजना को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
डिप्टी सीएम के बयान के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए निर्माण कार्यों में कथित लापरवाही और जवाबदेही का मुद्दा उठाया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार एक तरफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की बात करती है, जबकि दूसरी तरफ अपने ही विभाग की निर्माण परियोजना में सामने आई कमियों पर सख्त कार्रवाई के बजाय उन्हें सामान्य घटना के तौर पर पेश किया जा रहा है।
अब सवाल यह है कि राम वन गमन पथ की निर्माण गुणवत्ता को लेकर क्या तकनीकी जांच होगी और जिम्मेदारी तय होने पर संबंधित एजेंसी या अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी या नहीं।




