सिख धार्मिक स्थलों के खिलाफ बढ़ती घटनाओं पर SGPC सख्त, हरजिंदर सिंह धामी ने कनाडा सरकार से की खास अपील

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने विदेशों में सिख समुदाय और धार्मिक स्थलों के खिलाफ सामने आ रही नफरत की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने खास तौर पर कनाडा और अमेरिका में सिख समुदाय को लेकर सामने आने वाली ऐसी घटनाओं को चिंताजनक बताया। धामी ने संबंधित सरकारों से नफरत और घृणा फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की। हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि सिख धर्म का मूल सिद्धांत ‘सरबत दे भले’ यानी सभी के कल्याण की कामना पर आधारित है। सिख धर्म में किसी भी व्यक्ति के प्रति नफरत, भेदभाव, जाति या ऊंच-नीच की भावना के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं ने हमेशा इंसानियत, सच्चाई और बराबरी का संदेश दिया। गुरु नानक देव जी के समय भी उनकी विचारधारा का विरोध हुआ, लेकिन गुरुओं ने मानवता को समानता और भाईचारे का रास्ता दिखाया। धामी ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं हैं। इसमें भगतों, भाटों और गुरसिखों की बाणी दर्ज है, जो मानवता के लिए समानता और आध्यात्मिकता का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि हर सिख अपनी रोजाना की अरदास के अंत में ‘नानक नाम चढ़दी कला, तेरे भाणे सरबत दा भला’ की कामना करता है। इसका अर्थ भी यही है कि सभी के लिए भलाई और कल्याण की भावना रखी जाए।
SGPC अध्यक्ष ने कनाडा सरकार से विशेष तौर पर अपील करते हुए कहा कि वहां पंजाबी भाषा और सिख समुदाय की मौजूदगी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कनाडा में पंजाबी को प्रमुख भाषाओं में गिना जाता है और वहां सिख समुदाय लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण के इस दौर में कनाडा और अमेरिका की अर्थव्यवस्था में सिख समुदाय की भूमिका लगातार बढ़ी है। विदेशों में बसे पंजाबी केवल अपने परिवारों के लिए काम नहीं कर रहे, बल्कि बड़े स्तर पर कारोबार और रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहे हैं। धामी ने कहा कि एक समय पंजाब के लोगों को विदेशों से आर्थिक सहायता और पैसा मिलता था, लेकिन अब स्थिति काफी बदल चुकी है। विदेशों में बसे पंजाबी और सिख खुद बड़े कारोबार स्थापित कर रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद कुछ तत्व धार्मिक पहचान और धर्म के ज्ञान के खिलाफ नफरत फैलाने का प्रयास करते हैं। ऐसी घटनाएं किसी भी समाज के लिए चिंता का विषय हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। SGPC अध्यक्ष ने सरकारों से अपील की कि सिख समुदाय और धार्मिक स्थलों के खिलाफ होने वाली नफरत से जुड़ी घटनाओं को रोकने के लिए गंभीरता से प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और लोगों के बीच आपसी सम्मान बनाए रखना सरकारों की जिम्मेदारी है।
धामी ने सिख धर्म की शिक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि गुरु का संदेश हमेशा मानवता को जोड़ने वाला रहा है। गुरुशब्द की शरण में आने वाले हर इंसान को अपनाने और उसे सही मार्ग दिखाने की परंपरा सिख धर्म की खूबसूरती है। उन्होंने कहा कि सिख धर्म किसी के खिलाफ नफरत सिखाने के बजाय मानवता की सेवा और सभी के कल्याण का संदेश देता है। ऐसे में विदेशों में सिख समुदाय या धार्मिक स्थलों के खिलाफ नफरत फैलाने वाली घटनाओं को रोकना जरूरी है। धामी ने उम्मीद जताई कि कनाडा, अमेरिका और अन्य देशों की सरकारें ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेंगी और समुदायों के बीच भाईचारा, धार्मिक स्वतंत्रता और आपसी सम्मान का माहौल बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाएंगी।




