हरियाणा

कर्मचारियों की दो टूक- खैरात नहीं, संवैधानिक अधिकार मांग रहे; सरकार को दी चेतावनी

हरियाणा में नगर पालिका और फायर विभाग के कर्मचारियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। हरियाणा नगर पालिका कर्मचारी संघ और हरियाणा फायर विभाग कर्मचारी संघ ने अपनी राज्यव्यापी हड़ताल को तीन दिन और बढ़ाने का फैसला किया है। अब यह हड़ताल 9 सितंबर तक जारी रहेगी। कर्मचारी संगठनों ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर 9 सितंबर तक उनकी मांगों को लेकर लिखित आदेश जारी नहीं किए गए तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल दिया जाएगा। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उनकी राज्यव्यापी हड़ताल 6 अगस्त से जारी है। उनका आरोप है कि लंबे समय से मांगें उठाने के बावजूद सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। संघ ने कहा है कि 9 सितंबर तक मांगों पर ठोस और लिखित फैसला नहीं हुआ तो इसके बाद होने वाली अनिश्चितकालीन हड़ताल की जिम्मेदारी हरियाणा सरकार की होगी।

आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए कर्मचारियों ने अगले चरण की रणनीति भी तैयार कर ली है। 10, 11 और 12 सितंबर को प्रदेश के सभी जिलों में जन न्याय पंचायतें आयोजित की जाएंगी। इन पंचायतों के जरिए कर्मचारियों के आंदोलन को व्यापक सामाजिक समर्थन दिलाने और आगे की रणनीति तैयार करने की कोशिश की जाएगी। इसके बाद 13 सितंबर को कुरुक्षेत्र में राज्य स्तरीय जन न्याय पंचायत आयोजित करने का फैसला लिया गया है। राज्य स्तरीय पंचायत में विभिन्न सामाजिक और कर्मचारी संगठनों को जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए दलित, मजदूर और कर्मचारी संगठनों के अलावा किसान संगठनों, जन संगठनों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों और अलग-अलग समुदायों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। वाल्मीकि समुदाय के प्रतिनिधि संगठनों, व्यापारिक संगठनों और न्यायप्रिय नागरिकों से भी इस कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की गई है। कर्मचारी संगठन आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।

हरियाणा नगर पालिका कर्मचारी संघ ने प्रदेश के सामाजिक संगठनों और आम लोगों से सफाई, सीवर और फायर कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन करने की अपील की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे सरकार से किसी तरह की खैरात नहीं मांग रहे हैं। उनके मुताबिक, वे अपने जायज और संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम को खत्म करना, खाली पदों पर स्थायी भर्ती करना और अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करना शामिल है। इसके साथ ही कर्मचारी संगठनों ने उनके खिलाफ की गई कथित दमनात्मक कार्रवाई को वापस लेने की मांग भी उठाई है। संघ ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान कर्मचारियों पर नौकरी से निकालने, निलंबन, गिरफ्तारी और आपराधिक मामले दर्ज करने जैसी कार्रवाई की गई है। संगठन इन सभी कार्रवाइयों को वापस लेने की मांग कर रहा है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि दमनात्मक कार्रवाई के जरिए कर्मचारियों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने सरकार से जिद छोड़कर कर्मचारी यूनियनों के साथ सम्मानजनक बातचीत करने की अपील की है। संघ ने सरकार से मांगों पर जल्द फैसला लेने और सभी विवादित कार्रवाई वापस लेने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि 9 सितंबर तक लिखित आदेश जारी नहीं हुए तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन रूप दिया जाएगा। अब कर्मचारियों के अगले कदम और सरकार की ओर से होने वाली बातचीत पर सबकी नजर है। 13 सितंबर को कुरुक्षेत्र में होने वाली राज्य स्तरीय जन न्याय पंचायत को आंदोलन की आगे की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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