भारत-कनाडा की पहली आर्थिक वार्ता में UPI का मुद्दा, सीमा पार भुगतान पर हुई चर्चा

भारत और कनाडा के बीच आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल पर चर्चा हुई है। दोनों देश सीमा पार धन भेजने के लिए भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के संभावित इस्तेमाल पर बातचीत कर रहे हैं। इसके साथ ही कनाडा में दुकानदारों को सीधे भुगतान करने की सुविधा शुरू करने की संभावनाएं भी तलाश की जा रही हैं। भारत और कनाडा के बीच पहली आर्थिक एवं वित्तीय वार्ता के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैंपेन ने वित्तीय सहयोग बढ़ाने से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की। बातचीत में दोनों देशों के बीच भुगतान व्यवस्था को आसान और तेज बनाने पर विशेष जोर दिया गया। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कनाडा में भागीदार भुगतान सेवा प्रदाताओं के माध्यम से UPI के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। इससे भारत और कनाडा के बीच रहने वाले लोगों के लिए सीमा पार भुगतान और धन भेजने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।
हालांकि, UPI के जरिए कनाडा में सीमा पार भुगतान की यह व्यवस्था अभी लागू नहीं हुई है। इसे लागू करने से पहले दोनों देशों को तकनीकी व्यवस्था, नियम-कायदों, साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा और विदेशी मुद्रा से जुड़े पहलुओं पर काम करना होगा। भारत और कनाडा के बीच आर्थिक संबंधों में भारतीय समुदाय की भी बड़ी भूमिका है। कनाडा में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिनका दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं से सीधा जुड़ाव है। शिक्षा, कारोबार, निवेश और भारत में धन भेजने के कारण दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में कनाडा में 5 लाख 10 हजार 235 भारतीय नागरिक अध्ययन-अनुमति धारक थे। इससे दोनों देशों के बीच शिक्षा क्षेत्र में मौजूद मजबूत संबंधों का अंदाजा लगाया जा सकता है। कनाडा की 2025 की आव्रजन रिपोर्ट के अनुसार, भारत से कुल 1,25,530 लोगों को कनाडा में स्थायी निवास मिला। इनमें 94,105 लोग आर्थिक श्रेणी के तहत और 31,425 लोग परिवार पुनर्मिलन श्रेणी के तहत स्थायी निवासी बने। भारत और कनाडा के बीच व्यापार, निवेश और लोगों की आवाजाही के साथ अब डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाओं में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं भी सामने आ रही हैं। अगर UPI आधारित सीमा पार भुगतान व्यवस्था लागू होती है, तो इससे दोनों देशों के बीच छोटे और तेज डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए दोनों देशों के बीच नियामकीय सहमति और तकनीकी ढांचे को तैयार करना जरूरी होगा। फिलहाल बातचीत शुरुआती स्तर पर है और किसी अंतिम कार्यान्वयन की घोषणा नहीं हुई है।




