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नेपाल बाढ़ में हजारों लोग लापता, उत्तराखंड के एक व्यक्ति की भी तलाश; 8 विदेशी-मुंबई से जुड़े

देहरादून: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और जलप्रलय के बाद तबाही का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। हादसे में मरने वालों के साथ ही लापता लोगों की संख्या भी हजारों में पहुंच गई है। इस बीच नेपाल में अपनों के लापता होने की जानकारी मिलने के बाद कई परिवारों ने उत्तराखंड शासन और आपदा प्रबंधन विभाग से संपर्क किया है। उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, अब तक 9 लोगों के परिजनों ने राज्य शासन-प्रशासन से संपर्क किया है। इनमें एक व्यक्ति उत्तराखंड का रहने वाला है, जबकि अन्य आठ लोगों के परिजन उत्तराखंड में निवास करते हैं। इन आठ लोगों में अमेरिका, कनाडा और इंग्लैंड के नागरिकों के साथ मुंबई, महाराष्ट्र के तीन लोग शामिल हैं। प्रशासन की ओर से प्राप्त सभी जानकारियां केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों के साथ साझा कर दी गई हैं, ताकि नेपाल में जारी खोज एवं बचाव अभियान के दौरान इन लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।

नेपाल आपदा में उत्तराखंड से जुड़े 9 लोगों की जानकारी

उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, नेपाल में लापता लोगों को लेकर जिन परिवारों ने संपर्क किया है, उनमें अलग-अलग देशों और राज्यों से जुड़े लोग शामिल हैं। विभाग को मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिकी नागरिक मीणा गुप्ता और पंकज नाथ के परिजनों ने उत्तराखंड शासन से संपर्क किया। इसी तरह इंग्लैंड के नागरिक जगदीश मर्चेंट और तेजल मर्चेंट के रिश्तेदारों ने भी अपने परिजनों के नेपाल में लापता होने की सूचना दी। इसके अलावा कनाडा के नागरिक मोहित कौशिक के परिजनों ने भी उत्तराखंड प्रशासन को जानकारी दी है। वहीं उत्तराखंड के रहने वाले भवन दत्त के नेपाल में लापता होने की सूचना भी सामने आई है। मुंबई, महाराष्ट्र से जुड़े रीमा, रमन और बीना कुलकर्णी के परिजनों ने भी उत्तराखंड शासन-प्रशासन से संपर्क कर अपने परिजनों के नेपाल में लापता होने की जानकारी दी है। प्रशासन के अनुसार, इन सभी मामलों की जानकारी संबंधित केंद्रीय एजेंसियों और अन्य संबंधित संस्थाओं को भेज दी गई है।

करीब 4 हजार लोग अब भी लापता

नेपाल में प्राकृतिक आपदा के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में मृतकों की संख्या बढ़कर 987 हो गई है। नेपाल के बाढ़ प्रभावित आठ जिलों में राहत एवं बचाव दल लगातार मलबे में दबे लोगों और शवों की तलाश कर रहे हैं। नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार, करीब 3,916 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के शामिल होने की जानकारी भी सामने आई है। इसके चलते भारत से जुड़े परिवार भी अपने परिजनों की तलाश और उनकी स्थिति की जानकारी के लिए अलग-अलग माध्यमों से संपर्क कर रहे हैं।

चीन और तिब्बत में भी भारी नुकसान

नेपाल की सीमा से सटे इलाकों में आई इस आपदा का असर चीन और तिब्बत तक भी देखने को मिला है। चीनी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हादसे में चीन की तरफ 16 लोगों की मौत हुई है, जबकि तिब्बत में करीब 550 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हिमालयी क्षेत्र में आई इस प्राकृतिक आपदा ने कई इलाकों में व्यापक तबाही मचाई है और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं।

PM बालेंद्र शाह ने जलप्रलय को बताया जलवायु परिवर्तन से जुड़ा खतरा

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने इस प्राकृतिक आपदा को सामान्य घटना मानने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में पिछले सप्ताह आई विनाशकारी बाढ़ जलवायु परिवर्तन से जुड़े बढ़ते खतरों की ओर संकेत करती है। शाह के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम बढ़ रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष जलवायु परिवर्तन से नेपाल को होने वाली परेशानियों और इसके बढ़ते प्रभाव का मुद्दा मजबूती से उठाने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले देशों को भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए अधिक सतर्क और तैयार रहने की आवश्यकता है।

26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के बाद बिगड़े हालात

बताया गया है कि 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद हालात अचानक बिगड़ गए। ग्लेशियर से बर्फ और चट्टानों का मलबा नीचे की ओर आया और पानी, कीचड़ तथा भारी मलबे की तेज धारा में तब्दील हो गया। इस तेज बहाव ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते कई इलाकों में भारी तबाही मच गई और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए। आपदा के बाद राहत और बचाव एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रही हैं। मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश के साथ लापता लोगों की जानकारी जुटाने का काम भी जारी है।

उत्तराखंड प्रशासन ने केंद्र को भेजी सभी जानकारियां

नेपाल त्रासदी में लापता लोगों को लेकर उत्तराखंड से संपर्क करने वाले परिवारों की जानकारी प्रशासन ने संबंधित केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंचा दी है। अब इन लोगों की स्थिति के बारे में नेपाल में चल रहे खोज और बचाव अभियान से जानकारी जुटाई जा रही है। उत्तराखंड प्रशासन की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लापता लोगों के परिजन राज्य में रहते हैं और वे अपने परिवार के सदस्यों की जानकारी के लिए स्थानीय प्रशासन से संपर्क कर रहे हैं। नेपाल में जारी इस बड़े राहत अभियान के बीच उत्तराखंड से जुड़े परिवार अपने परिजनों की सुरक्षित वापसी या उनकी स्थिति की आधिकारिक जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

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