हरियाणा

पीपीपी डाटा से तय होगी वार्डों की आबादी, चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक कदम

हरियाणा में अगले वर्ष प्रस्तावित नगर परिषद और नगर पालिका चुनावों की तैयारियां तेज हो गई हैं। शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने राज्य के 20 नगर परिषदों और 46 नगर पालिकाओं सहित कुल 66 शहरी निकायों में वार्डों के परिसीमन यानी वार्डबंदी की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। नई वार्डबंदी के आधार पर ही आगामी निकाय चुनाव कराए जाएंगे, जिसके लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा ने वार्डबंदी प्रक्रिया को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। निर्देशों के अनुसार इस बार वार्डों की सीमाएं एक अक्टूबर 2026 को परिवार पहचान पत्र (PPP) डाटा में दर्ज जनसंख्या के आधार पर तय की जाएंगी। प्रत्येक निकाय में आबादी के अनुपात के अनुसार वार्डों का पुनर्गठन किया जाएगा, ताकि सभी वार्डों में जनसंख्या का संतुलन बनाए रखा जा सके। सरकार ने इस बार पारंपरिक डोर-टू-डोर सर्वे की व्यवस्था को समाप्त करते हुए परिवार पहचान पत्र (PPP) डाटा को आधार बनाने का फैसला किया है। इससे वार्ड निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने का प्रयास किया जाएगा। नई सीमाएं तय होने के बाद उनका प्रारूप सार्वजनिक किया जाएगा, जिस पर आम नागरिकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे। सभी आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम वार्डबंदी अधिसूचना जारी होगी।

प्रदेश की जिन 66 शहरी निकायों में चुनाव होने हैं, उनमें 20 नगर परिषद और 46 नगर पालिकाएं शामिल हैं। नगर परिषदों में चरखी दादरी, फतेहाबाद, टोहाना, सोहना, हांसी, बहादुरगढ़, जींद, नरवाना, कैथल, नारनौल, पलवल, होडल, मंडी डबवाली, गोहाना, कालका, झज्जर, नूंह, भिवानी, समालखा और बरवाला शामिल हैं। वहीं 46 नगर पालिकाओं में भी चुनाव कराए जाएंगे, जिनमें कुंडली, नारायणगढ़, रतिया, सफीदों, घरौंडा, तरावड़ी, असंध, शाहाबाद, लाडवा, पिहोवा, महेंद्रगढ़, नांगल चौधरी, पुन्हाना, बावल, महम, ऐलनाबाद, रानियां और गन्नौर समेत कई अन्य निकाय शामिल हैं। सरकार की योजना है कि जून 2027 में वर्तमान कार्यकाल समाप्त होने से पहले वार्डबंदी, मतदाता सूची का पुनरीक्षण और अन्य सभी चुनावी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं। प्रदेश के 46 शहरी निकायों का कार्यकाल जून 2027 में समाप्त होगा, जिनमें 18 नगर परिषद और 28 नगर पालिकाएं शामिल हैं। इन निकायों का चुनाव वर्ष 2022 में हुआ था। अब नई वार्डबंदी के जरिए जनसंख्या के अनुरूप समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करते हुए चुनाव कराने की तैयारी की जा रही है।

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