उत्तराखंड

ग्लासगो से आई खुशखबरी, उन्नति शर्मा ने भारत को दिलाया मेडल

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की बेटी उन्नति शर्मा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया है। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उन्नति ने महिलाओं के 63 किलोग्राम जूडो वर्ग में कांस्य पदक जीतकर देश के लिए गौरव का पल रच दिया। उनकी इस उपलब्धि से पूरे उत्तराखंड और देशभर में खुशी का माहौल है। प्रतियोगिता के दौरान उन्नति शर्मा ने शुरुआत से ही शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने राउंड ऑफ-16 और क्वार्टर फाइनल मुकाबलों में दमदार जीत दर्ज करते हुए सेमीफाइनल में जगह बनाई। हालांकि सेमीफाइनल में उन्हें ऑस्ट्रेलिया की खिलाड़ी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपना आत्मविश्वास नहीं खोया और वापसी का शानदार उदाहरण पेश किया। कांस्य पदक के मुकाबले में उन्नति ने दक्षिण अफ्रीका की स्काई नोएस्टर को हराकर भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इस जीत के साथ उन्होंने साबित कर दिया कि मुश्किल परिस्थितियों में भी धैर्य और आत्मविश्वास सफलता की सबसे बड़ी कुंजी होते हैं। उनके इस प्रदर्शन की देशभर में सराहना हो रही है। उन्नति की बहन रिया शर्मा ने कहा कि पिछले कुछ समय से उनका प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। लगातार मेहनत और समर्पण का ही परिणाम है कि आज उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े मंच पर भारत के लिए पदक जीतकर पूरे परिवार और देश को गौरवान्वित किया है।

उन्नति की मां ममता शर्मा ने भावुक होते हुए कहा कि उनकी बेटी ने अपने खेल जीवन में कई चोटों और कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन उसने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। परिवार की सबसे छोटी और लाड़ली बेटी होने के बावजूद उसने अनुशासन और मेहनत के दम पर आज यह मुकाम हासिल किया है। देहरादून की रहने वाली उन्नति शर्मा पिछले कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट (IIS) में प्रशिक्षण लेने वाली उन्नति ने भारतीय जूडो में अपनी अलग पहचान बनाई है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का यह कांस्य पदक उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है। उन्नति शर्मा की यह सफलता उत्तराखंड के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उनका संघर्ष, मेहनत और कभी हार न मानने का जज्बा यह संदेश देता है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास लगातार जारी रहें तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी सफलता हासिल की जा सकती है।

Related Articles

Back to top button