पंजाब

पंजाब सरकार और किसानों की बैठक बेनतीजा, आंदोलन होगा तेज


पंजाब सरकार और किसान नेताओं के बीच शुक्रवार देर रात चंडीगढ़ में हुई उच्चस्तरीय बैठक बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई। कई घंटों तक चली इस बैठक में किसानों की विभिन्न मांगों पर चर्चा हुई, लेकिन किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। बैठक के बाद किसान संगठनों ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए आंदोलन तेज करने का ऐलान कर दिया। बैठक के दौरान अधिकारियों ने स्वीकार किया कि लैंड मॉर्गेज बैंकों द्वारा किसानों से ऋण प्रक्रिया के दौरान रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के साथ ब्लैंक चेक (खाली चेक) भी गिरवी के रूप में लिए गए थे। इस स्वीकारोक्ति के बाद किसान संगठनों ने बैंक अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। किसान नेताओं का आरोप है कि सरकार दोषी बैंक प्रबंधकों और कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाने का प्रयास कर रही है। उनका कहना है कि किसानों के साथ हुई इस कथित धोखाधड़ी के जिम्मेदार लोगों पर आपराधिक मामला दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

बैठक में संयुक्त किसान मोर्चा (नॉन-पॉलिटिकल) और भारतीय किसान यूनियन (सिद्धूपुर) के प्रतिनिधियों ने विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां से मांग की कि किसानों से जबरन लिए गए सभी खाली चेक तुरंत वापस कराए जाएं। साथ ही दोषी बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। किसानों ने शंभू और खनौरी बॉर्डर पर आंदोलन के दौरान हुए नुकसान का उचित मुआवजा देने की भी मांग दोहराई। इसके अलावा कर्ज के बोझ से परेशान किसानों को राहत देने के लिए वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना लागू करने की मांग भी सरकार के सामने रखी गई। सरकार की ओर से मांगों पर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलने से किसान संगठन संतुष्ट नहीं हुए। इसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा (नॉन-पॉलिटिकल) और भारतीय किसान यूनियन (सिद्धूपुर) ने घोषणा की कि वे 5 अगस्त को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ पंजाब विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के फरीदकोट स्थित आवास का घेराव करेंगे और वहां पक्का मोर्चा लगाएंगे। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को पूरे पंजाब में और व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा। उनका कहना है कि किसानों के अधिकारों और न्याय की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती।




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