CM Grid Project में बड़ी लापरवाही, सड़क निर्माण में खामियां मिलने पर कंपनी पर 5 लाख का जुर्माना

आगरा: मुख्यमंत्री ग्रिड यानी CM Grid योजना के तहत आगरा में चल रहे सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर नगर निगम ने सख्त रुख अपनाया है। सुभाष पार्क से मारुति एस्टेट चौराहे तक चल रहे निर्माण कार्य में कई तकनीकी और गुणवत्ता संबंधी खामियां मिलने के बाद नगर निगम ने कार्यदायी संस्था कोणार्क एसोसिएट्स पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। नगर निगम की जांच में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता से लेकर स्टॉर्म वाटर पाइपलाइन और साइट पर सुरक्षा व्यवस्था तक कई कमियां सामने आईं। निगम ने कंपनी को नोटिस जारी करते हुए तत्काल सभी गड़बड़ियों को दूर करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि निर्माण कार्य में दोबारा लापरवाही पाई गई तो अनुबंध की शर्तों के तहत कंपनी के खिलाफ इससे भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
दो हिस्सों में चल रहा है सड़क निर्माण
CM Grid योजना के तहत जिस सड़क का निर्माण कराया जा रहा है, उसमें सुभाष पार्क से कोठी मीना बाजार और कोठी मीना बाजार से मारुति एस्टेट चौराहे तक का हिस्सा शामिल है। नगर निगम के अधिकारियों द्वारा लगातार निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है। इसी क्रम में सहायक अभियंता कपीश बुधौलिया और क्षेत्रीय अवर अभियंता मुकेश कुमार ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्माण कार्य में कई ऐसी कमियां मिलीं, जो निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं थीं।
अलग-अलग ब्रांड की घटिया ईंटों का इस्तेमाल
निरीक्षण के दौरान सबसे प्रमुख कमी निर्माण सामग्री को लेकर सामने आई। अधिकारियों के मुताबिक साइट पर अलग-अलग ब्रांड और अलग-अलग आकार की ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन ईंटों की गुणवत्ता को निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता सड़क की मजबूती और उसकी लंबी उम्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में मानक के विपरीत सामग्री का इस्तेमाल पाए जाने पर नगर निगम ने इसे गंभीर लापरवाही माना और कार्रवाई की।
1000 एमएम स्टॉर्म वाटर पाइपलाइन में भी खामियां
निरीक्षण के दौरान सड़क के साथ बनाई जा रही 1000 एमएम व्यास की स्टॉर्म वाटर पाइपलाइन में भी तकनीकी गड़बड़ियां सामने आईं। अधिकारियों के अनुसार पाइपलाइन के कई जोड़ों को ठीक तरीके से नहीं भरा गया था। इसके अलावा पाइपलाइन का बेस भी निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज व्यवस्था सड़क परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। पाइपलाइन के निर्माण में खामी रहने पर भविष्य में जल निकासी प्रभावित होने और सड़क की संरचना को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
चार महीने बाद भी मैटेरियल टेस्टिंग लैब नहीं
नगर निगम के प्रभारी मुख्य अभियंता अरविंद श्रीवास्तव के अनुसार साइट पर निर्माण शुरू हुए करीब चार महीने का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक वहां मैटेरियल टेस्टिंग लैब स्थापित नहीं की गई। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच के लिए साइट पर टेस्टिंग की व्यवस्था होना जरूरी माना जाता है। ऐसे में लैब का स्थापित नहीं होना भी निगम की नजर में गंभीर कमी रही। इसके अलावा निरीक्षण के दौरान निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी भी पाई गई। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था को निर्धारित मानकों के अनुरूप करने के निर्देश दिए हैं।
पहले भी लगाया जा चुका है 1 लाख रुपये का जुर्माना
यह पहली बार नहीं है जब कोणार्क एसोसिएट्स के खिलाफ कार्रवाई हुई है। इससे पहले भी कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। इसके बावजूद निर्माण कार्य में दोबारा खामियां मिलने के बाद नगर निगम ने अब पांच लाख रुपये की पेनल्टी लगाई है। निगम ने कंपनी को साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि आगे भी गुणवत्ता में लापरवाही या अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन सामने आया तो नियमानुसार और कठोर कार्रवाई की जाएगी।
तत्काल सुधार के निर्देश
नगर निगम की ओर से कंपनी को नोटिस जारी कर निर्माण स्थल पर मिली सभी खामियों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, स्टॉर्म वाटर पाइपलाइन, बेस, जॉइंट और अन्य तकनीकी कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार ही किए जाएं। नगर निगम की निगरानी आगे भी जारी रहने वाली है और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर नियमित निरीक्षण किए जाएंगे।
नगर आयुक्त ने कहा- गुणवत्ता से समझौता नहीं
नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने कहा कि CM Grid प्रोजेक्ट के तहत शहर में चल रहे सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि सभी निर्माणाधीन सड़कों का निरीक्षण कराया जा रहा है और जहां भी मानकों के विपरीत काम मिलता है, वहां संबंधित कार्यदायी संस्था के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नगर आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल जुर्माना लगाना ही अंतिम कार्रवाई नहीं होगी। यदि कंपनी की ओर से दोबारा लापरवाही सामने आती है तो अनुबंध की शर्तों के अनुसार और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
अब आगे क्या होगा?
पांच लाख रुपये के जुर्माने और नोटिस के बाद अब कार्यदायी संस्था को निर्माण कार्य में मिली कमियों को दूर करना होगा। साथ ही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, पाइपलाइन के काम और सुरक्षा व्यवस्था को निर्धारित मानकों के अनुरूप करना होगा। नगर निगम की आगामी जांच में यदि कमियां दोबारा मिलती हैं तो कंपनी के खिलाफ अनुबंध के तहत अतिरिक्त कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल CM Grid योजना के तहत चल रहे इस निर्माण कार्य पर नगर निगम की निगरानी बढ़ गई है और अधिकारियों का कहना है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।



