उत्तराखंड

उत्तराखंड वोटर लिस्ट में बड़ा अपडेट, 19 लाख रिकॉर्ड में मिली खामी; जानें Form-6, 7 और 8 का काम

देहरादून:- उत्तराखंड में मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट करने के लिए चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) अभियान की प्रक्रिया तेज हो गई है। निर्वाचन विभाग इस अभियान के जरिए मतदाता सूची में दर्ज नाम, पता, उम्र और अन्य जानकारियों का सत्यापन कर रहा है। जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में किसी तरह की विसंगति या त्रुटि सामने आई है, उन्हें चरणबद्ध तरीके से नोटिस भेजे जा रहे हैं।

गुरुवार को देहरादून में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर SIR अभियान की प्रगति, नोटिस प्रक्रिया और मतदाताओं के लिए उपलब्ध दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नोटिस जारी होने का मतलब किसी मतदाता का नाम सीधे मतदाता सूची से हटाना नहीं है। नोटिस का उद्देश्य रिकॉर्ड की जानकारी का सत्यापन करना और संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर देना है।

19 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में मिली त्रुटि

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, प्रदेश में अब तक करीब 19 लाख ऐसे मतदाताओं की पहचान की गई है, जिनके रिकॉर्ड में किसी न किसी प्रकार की त्रुटि या विसंगति सामने आई है। ऐसे मतदाताओं को चरणबद्ध तरीके से नोटिस जारी किए जा रहे हैं। नोटिस मिलने के बाद संबंधित मतदाता निर्धारित समय के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रख सकते हैं और यदि रिकॉर्ड में कोई गलती है तो उसे दुरुस्त कराया जा सकता है। निर्वाचन विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय और त्रुटिरहित बनाना है।

5.26 लाख मतदाताओं की मैपिंग अभी बाकी

SIR अभियान के दौरान प्रदेश में बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा है। हालांकि अभी भी करीब 5.26 लाख मतदाताओं की मैपिंग पूरी नहीं हो सकी है। इन मतदाताओं तक पहुंचने और उनके रिकॉर्ड का सत्यापन करने के लिए बूथ लेवल अधिकारियों यानी BLO के माध्यम से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। निर्वाचन विभाग का लक्ष्य है कि निर्धारित समय के भीतर सभी मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन पूरा हो और कोई भी पात्र नागरिक तकनीकी या रिकॉर्ड संबंधी समस्या के कारण मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।

नाम जोड़ना है तो भरना होगा Form-6

निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं के लिए अलग-अलग काम के लिए अलग फॉर्म निर्धारित किए हैं। यदि कोई पात्र नागरिक अभी तक मतदाता सूची में शामिल नहीं है तो वह Form-6 के माध्यम से नए मतदाता के तौर पर पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकता है। यानी जिन युवाओं या पात्र नागरिकों का नाम अभी तक वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं हुआ है, उनके लिए यह प्रक्रिया मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का अवसर है।

नाम या पता गलत है तो Form-8 से सुधार

यदि किसी मतदाता के नाम, पते, उम्र या मतदाता सूची में दर्ज अन्य जानकारी में गलती है तो उसे सुधारने के लिए Form-8 का इस्तेमाल किया जा सकता है। निर्वाचन विभाग के मुताबिक, संबंधित मतदाता आवश्यक जानकारी और दस्तावेजों के साथ संशोधन के लिए आवेदन कर सकता है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज व्यक्तिगत विवरण को सही और अपडेट करना है।

नाम हटाने या आपत्ति के लिए Form-7

किसी नाम को मतदाता सूची से हटाने या किसी नाम को लेकर आपत्ति दर्ज कराने की स्थिति में Form-7 का प्रावधान है। निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे अपनी स्थिति के अनुसार निर्धारित फॉर्म का इस्तेमाल करें और समय सीमा के भीतर आवेदन या आपत्ति दर्ज कराएं।

14 जुलाई से 13 अगस्त तक दावे-आपत्तियों का मौका

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि Form-6, Form-7 और Form-8 के माध्यम से आवेदन करने की प्रक्रिया 14 जुलाई से शुरू हो चुकी है और 13 अगस्त तक जारी रहेगी। इस अवधि के दौरान पात्र नागरिक नए पंजीकरण, रिकॉर्ड में संशोधन और नाम से संबंधित आपत्ति जैसे मामलों में आवेदन कर सकते हैं। निर्वाचन विभाग का उद्देश्य इस प्रक्रिया के बाद प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची को अधिक सटीक, अपडेट और त्रुटिरहित बनाना है।

अल्मोड़ा सबसे आगे, करीब 80% नोटिस जारी

निर्वाचन विभाग ने SIR अभियान की जिलावार प्रगति की जानकारी भी साझा की है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अल्मोड़ा जिला नोटिस जारी करने के मामले में सबसे आगे चल रहा है। अल्मोड़ा में जिन मतदाताओं को नोटिस जारी किया जाना है, उनमें से करीब 80 प्रतिशत तक नोटिस पहुंचाए जा चुके हैं। निर्वाचन विभाग ने इसे संतोषजनक प्रगति बताया है। वहीं चंपावत में 62.1 प्रतिशत मतदाताओं तक नोटिस पहुंचाए जाने की जानकारी दी गई है।

कई जिलों में अभियान की रफ्तार धीमी

जहां कुछ जिलों में SIR अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं कई जिलों में नोटिस जारी करने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी है।

निर्वाचन विभाग के अनुसार:

  • टिहरी: 4.7 प्रतिशत
  • उत्तरकाशी: 4.8 प्रतिशत
  • रुद्रप्रयाग: 5.5 प्रतिशत
  • ऊधमसिंह नगर: 6.7 प्रतिशत

इन जिलों में अभियान की गति बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि निर्धारित समयसीमा में मतदाताओं के रिकॉर्ड का सत्यापन पूरा किया जा सके।

नोटिस मिलने पर घबराने की जरूरत नहीं

निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात स्पष्ट करते हुए कहा है कि नोटिस जारी होना नाम कटने का संकेत नहीं है। नोटिस का उद्देश्य संबंधित मतदाता के रिकॉर्ड और जानकारी का सत्यापन करना है। मतदाता को अपना पक्ष रखने और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाएगा। यदि किसी मतदाता के रिकॉर्ड में कोई गलती है तो वह निर्धारित फॉर्म के जरिए उसमें सुधार करा सकता है। विभाग का कहना है कि प्रक्रिया का मकसद पात्र मतदाताओं को सूची से बाहर करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन बनाना है।

BLO के जरिए सत्यापन की प्रक्रिया जारी

जिन मतदाताओं की मैपिंग अभी पूरी नहीं हुई है, उनके सत्यापन के लिए बूथ लेवल अधिकारियों को सक्रिय किया गया है। BLO स्थानीय स्तर पर मतदाताओं से संपर्क कर उनकी जानकारी जुटाने और रिकॉर्ड का मिलान करने का काम कर रहे हैं। निर्वाचन विभाग की कोशिश है कि SIR प्रक्रिया के दौरान प्रत्येक पात्र मतदाता का रिकॉर्ड सही तरीके से सत्यापित हो और अंतिम मतदाता सूची तैयार करते समय किसी तरह की अनावश्यक त्रुटि न रह जाए। ऐसे में यदि किसी मतदाता को नोटिस मिलता है या उसके रिकॉर्ड में कोई गलती दिखाई देती है तो उसे निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित फॉर्म और जरूरी दस्तावेजों के साथ अपनी जानकारी दुरुस्त कराने की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।

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