राष्ट्रीय

पेपर लीक विवाद पर अन्ना हजारे का समर्थन, सरकार को लिखा पत्र

दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को अब वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे का भी समर्थन मिल गया है। महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में उन्होंने महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने करीब दो घंटे तक मौन आंदोलन कर छात्रों के प्रति अपना समर्थन जताया। इस दौरान उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। अन्ना हजारे का मौन प्रदर्शन सुबह 11 बजे शुरू हुआ और दोपहर 1 बजे समाप्त हुआ। उन्होंने बिना किसी भाषण या नारेबाजी के शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। आंदोलन समाप्त होने के बाद उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च नेतृत्व तक छात्रों और आम जनता की भावनाओं को पहुंचाना उनका नैतिक दायित्व है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में अन्ना हजारे ने कहा कि छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई बेहद दुखद है। उनका मानना है कि युवाओं का आक्रोश केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि उनके भविष्य, रोजगार और व्यवस्था पर भरोसे से जुड़ा गंभीर विषय है। इसलिए सरकार को इस पूरे मुद्दे को संवेदनशीलता और गंभीरता से देखना चाहिए। अन्ना हजारे ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देते हैं तो इससे सरकार कमजोर नहीं होगी, बल्कि जनता के बीच सरकार की जवाबदेही और विश्वास दोनों मजबूत होंगे। लोकतंत्र में जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है। उन्होंने सरकार से अपील की कि छात्रों के गुस्से का जवाब बल प्रयोग या लाठीचार्ज नहीं होना चाहिए। इसके बजाय सरकार को छात्रों के प्रतिनिधियों से सीधे बातचीत करनी चाहिए और उनकी समस्याओं का शांतिपूर्ण समाधान निकालना चाहिए। उनका कहना है कि संवाद ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

दिल्ली में हाल के दिनों में बड़ी संख्या में छात्र पेपर लीक, परीक्षा में कथित अनियमितताओं, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच टकराव की घटनाएं भी सामने आईं, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हुए और कुछ को हिरासत में लिया गया। इसके बाद आंदोलन और तेज हो गया।अन्ना हजारे का कहना है कि उन्होंने छात्रों की आवाज प्रधानमंत्री तक पहुंचाने का अपना दायित्व निभाया है। अब देशभर की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर है कि वह छात्रों की मांगों, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पूरे विवाद के समाधान को लेकर क्या फैसला लेती है।

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