पंजाब

अमृतसर में शिव भक्ति का महासंगम, हंसराज रघुवंशी देंगे विशेष प्रस्तुति


अमृतसर में आगामी 27 जून को धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का एक भव्य आयोजन ‘एक शाम भगवान शिव के नाम’ के रूप में आयोजित किया जाएगा। इस विशेष कार्यक्रम में देश के प्रसिद्ध भजन गायक हंसराज रघुवंशी अपनी मधुर आवाज में भगवान शिव की महिमा का गुणगान करेंगे। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं और शिव भक्तों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।

कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर पंजाब पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों विभाग के सलाहकार दीपक बाली ने आम आदमी पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और सनातन सेवा समिति के पदाधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य की जानकारी साझा की।

दीपक बाली ने कहा कि सनातन धर्म केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और विरासत का आधार है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जो आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर हमें सौंपी है, उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ इस तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में युवाओं को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ना बेहद आवश्यक है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी न केवल अपनी धार्मिक मान्यताओं को समझती है, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति भी जागरूक होती है। ‘एक शाम भगवान शिव के नाम’ कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

कार्यक्रम में भगवान शिव के भजनों, आध्यात्मिक प्रस्तुतियों और भक्तिमय वातावरण के माध्यम से श्रद्धालुओं को एक विशेष अनुभव प्रदान किया जाएगा। प्रसिद्ध गायक हंसराज रघुवंशी अपने लोकप्रिय शिव भजनों की प्रस्तुति देंगे, जिनकी देशभर में बड़ी संख्या में भक्तों के बीच लोकप्रियता है। उनके भजनों के जरिए पूरा वातावरण शिवमय होने की उम्मीद है।

आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोगों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

‘एक शाम भगवान शिव के नाम’ केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकता को मजबूत करने का प्रयास भी है। आयोजकों का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक संदेश देने के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी सशक्त बनाते हैं।




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