उत्तराखंड

कांपने के बजाय काम आई अदम्य वीरता: देहरादून के बच्चों ने पेश की इंसानियत की मिसाल।

देहरादून: साहस की कोई उम्र नहीं होती और वीरता केवल युद्ध के मैदान में ही नहीं, बल्कि आम जीवन की मुश्किल घड़ियों में भी दिखाई जा सकती है। देहरादून के डालनवाला क्षेत्र में 15 साल के प्रणवत सिंह और 10 साल के दिवजोत सिंह ने इसे साबित कर दिखाया है।

क्या थी घटना? बीती 21 दिसंबर को मोहिनी रोड पर जब लोग अपने घरों में दुबके थे, तब एक महिला के कपड़ों में दीये से भीषण आग लग गई। महिला चीख रही थी, शरीर आग की लपटों में था, लेकिन वहां इन दो बच्चों के अलावा कोई मौजूद नहीं था।

बहादुरी और बुद्धिमत्ता का संगम: आम तौर पर ऐसी आग देखकर बड़े-बड़े लोग घबरा जाते हैं, लेकिन 10वीं के छात्र प्रणवत ने तुरंत अपनी जैकेट से आग को ढककर ऑक्सीजन की सप्लाई काटी, वहीं नन्हे दिवजोत ने बिना वक्त गंवाए पानी लाकर आग को पूरी तरह ठंडा कर दिया। इन दोनों की जुगलबंदी ने एक बड़ा हादसा टाल दिया और महिला की जान बचा ली।

एसएसपी ने बढ़ाया मान: एसएसपी अजय सिंह ने इन बच्चों को पुलिस कार्यालय बुलाकर प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि “इन बच्चों ने जो किया, वह समाज के लिए एक प्रेरणा है। आपातकालीन स्थिति में जागरूकता और तुरंत निर्णय लेना ही असली बहादुरी है।”

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