2022-06-28

13 अक्‍टूबर 2019 को है शरद पूर्णिमा, इस रात चंद्रमा की अद्भुत रोशनी अमृत समान होती है, रात को भगवान शिव को खीर करें अर्पित

डेस्क। हर साल अक्‍टूबर के महीने में शरद पूर्णिमा आती है. इस बार शरद पूर्णिमा 13 अक्‍टूबर 2019 को है शरद पूर्णिमा पर खीर खाने की प्रथा है. इसके पीछे ऐसी मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की अद्भुत रोशनी से जो ऊर्जा निकलती है जोकि अमृत समान होती है

अश्विन मास की शरद पूर्णिमा इस बार 13 अक्टूबर, रविवार को है. इस बार यह अमृतयोग और सर्वार्थ सिद्धि योग में आ रही है. रविवार को पूर्णिमा का आरंभ रात 12 बजकर 36 मिनट से है

शरद पूर्णिमा तिथि: रविवार, 13 अक्‍टूबर 2019
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 13 अक्‍टूबर 2019 की रात 12 बजकर 36 मिनट से
पूर्णिमा तिथि समाप्‍त: 14 अक्‍टूबर की रात 02 बजकर 38 मिनट तक
चंद्रोदय का समय: 13 अक्‍टूबर 2019 की शाम 05 बजकर 26 मिनट

इससे पूर्व इस खीर को भगवान शिव को अवश्य अर्पित करना चाहिए. इस प्रसाद वाले खीर को छत पर चंद्रमा के प्रकाश में रखें और फिर इसे परिवार के सभी सदस्यों को ग्रहण करना चाहिए. ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. व्यापार, करियर में बढ़ोतरी होती है साथ उस परिवार के लोगों को कभी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता

वहीं अगर इस अवसर पर खीर खाने के वैज्ञानिक कारणों से देखें तो पाएंगे कि दूध में लैक्टिक अम्ल और अमृत तत्व होता है जो कि चांद की किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है

चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रया और आसान हो जाती है. इसी कारण ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर खुले आसमान में रखने का विधान किया है. यह परंपरा विज्ञान पर आधारित है

शोध के अनुसार खीर को चांदी के पात्र में बनाना चाहिए क्योंकि चांदी में प्रतिरोधकता अधिक होती है. यही कारण है कि इस दिन चांदी के पात्र में खुले आसमान के नीचे खीर बनाने और इसे ग्रहण करने की मान्यता है

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