पंजाब चुनाव से पहले BJP का बड़ा दांव, सतीश पूनिया बने प्रदेश प्रभारी


भारतीय जनता पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर पंजाब में संगठन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया को पंजाब भाजपा का प्रभारी नियुक्त किया है। भाजपा की ओर से इस संबंध में नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया है। सतीश पूनिया को पंजाब की जिम्मेदारी ऐसे समय दी गई है, जब पार्टी राज्य में अपने संगठन और राजनीतिक आधार को विस्तार देने की तैयारी में जुटी है। सतीश पूनिया इससे पहले हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा के चुनाव प्रभारी की भूमिका निभा चुके हैं। हरियाणा के बाद अब उन्हें पंजाब की जिम्मेदारी सौंपना पार्टी के लिए अहम संगठनात्मक फैसला माना जा रहा है। पंजाब में भाजपा लंबे समय से अपने पारंपरिक शहरी आधार से आगे बढ़कर ग्रामीण क्षेत्रों में भी संगठन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में सतीश पूनिया के अनुभव का इस्तेमाल पार्टी चुनावी रणनीति और संगठन विस्तार में कर सकती है।
पार्टी की नई नियुक्तियों में पंजाब के साथ कई अन्य राज्यों को भी महत्वपूर्ण पदाधिकारी मिले हैं। तरुण चुघ को गुजरात का प्रभारी नियुक्त किया गया है, जबकि विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। इसके अलावा जगदीश ईश्वरभाई पटेल को उत्तर प्रदेश का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों के साथ भाजपा ने अलग-अलग राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियों का नए सिरे से बंटवारा किया है। भाजपा ने इससे पहले भी एक दिन पहले 65 पदाधिकारियों की घोषणा की थी। लगातार हो रही इन नियुक्तियों से साफ है कि पार्टी आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को चुनावी मोड में ला रही है। पंजाब भाजपा के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती अपने वोट प्रतिशत को विधानसभा सीटों में बदलने की है। लोकसभा चुनावों में पार्टी ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया है, लेकिन विधानसभा स्तर पर मजबूत संगठन और स्थानीय प्रभाव वाले चेहरों की जरूरत बनी हुई है।
सतीश पूनिया के सामने पंजाब में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने और पार्टी की चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने की चुनौती होगी। भाजपा के लिए पंजाब में ग्रामीण और सिख मतदाताओं के बीच राजनीतिक पकड़ बढ़ाना भी अहम लक्ष्य है। पार्टी अकाली दल से अलग होने के बाद राज्य में अपना स्वतंत्र संगठन और राजनीतिक आधार मजबूत करने पर लगातार जोर दे रही है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए नई नियुक्तियों को भाजपा की व्यापक चुनावी तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। अब पंजाब में सतीश पूनिया की भूमिका और उनके नेतृत्व में पार्टी की रणनीति पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।




