गुरुग्राम से रोहतक तक दौड़ेंगी ई-बसें, हरियाणा में 875 बसों की योजना

हरियाणा के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से जुड़े शहरों में वायु प्रदूषण कम करने के लिए ई-बसों का नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के तहत प्रदेश के सात निकायों वाले शहरों में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना पर काम किया जा रहा है। प्रस्तावित योजना के मुताबिक गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, मानेसर, करनाल, पानीपत और रोहतक में कुल 875 ई-बसें चलाने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, जून तक इन शहरों में केवल 70 ई-बसें ही सड़कों पर उतर पाई थीं। अब बसों की खरीद और संचालन की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक जून तक सोनीपत में 15, करनाल में 5, पानीपत में 45 और रोहतक में 5 ई-बसें संचालित हो रही थीं। वहीं गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे बड़े शहरों में ई-बसों की जरूरत सबसे ज्यादा है। मौजूदा योजना के तहत गुरुग्राम और फरीदाबाद में 300-300 ई-बसों की आवश्यकता बताई गई है। सोनीपत में 130, करनाल में 45 और रोहतक में 30 बसों की जरूरत है। इन शहरों में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के साथ-साथ प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
बसों की खरीद को लेकर भी प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। गुरुग्राम और फरीदाबाद के लिए 100-100 ई-बसों की खरीद के आदेश जारी हो चुके हैं। इसके अलावा सोनीपत के लिए 45, करनाल के लिए 50, पानीपत के लिए 45 और रोहतक के लिए 35 ई-बसें खरीदने की योजना है। इस तरह अलग-अलग शहरों के लिए खरीद प्रक्रिया पूरी होने के बाद सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। नई ई-बसों के आने से यात्रियों को आधुनिक और अपेक्षाकृत पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिल सकती है। हरियाणा सरकार का फोकस खास तौर पर NCR क्षेत्र के शहरों में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने पर है। पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों से सीधे तौर पर सड़क परिवहन से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है। परिवहन मंत्री अनिल विज ने कहा है कि ई-बसों की खरीद चरणवार तरीके से की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के बजट में भी ई-बसों की खरीद को लेकर घोषणा की गई थी और उस दिशा में भी काम किया जाएगा।
ई-बस योजना के तहत सिर्फ बसों की खरीद ही नहीं, बल्कि उनके संचालन के लिए जरूरी परिवहन व्यवस्था और संबंधित बुनियादी ढांचे को विकसित करना भी अहम होगा। शहरों में बसों की संख्या बढ़ने से लोगों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे NCR के बड़े शहरों में ट्रैफिक और वायु प्रदूषण दोनों बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में ई-बसों का संचालन सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के साथ पर्यावरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार की योजना अगर तय चरणों के अनुसार आगे बढ़ती है तो आने वाले समय में हरियाणा के इन सात शहरों में ई-बसों की उपलब्धता बढ़ सकती है। फिलहाल खरीद आदेश और संचालन की प्रक्रिया के पूरा होने का इंतजार है।




