जंतर-मंतर के बाद BJP ने बदली रणनीति? नायब सैनी ने युवाओं से टकराव से बचने को कहा

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल के घटनाक्रम के बाद हरियाणा की राजनीति में नई पीढ़ी यानी Gen-Z के साथ संवाद का मुद्दा भाजपा संगठन की रणनीति में अहम हो गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को युवाओं के साथ टकराव से बचने और संवाद के जरिए विश्वास बनाने का संदेश दिया है। नायब सैनी का जोर इस बात पर है कि किसी भी युवा की बात का जवाब देने से पहले उसकी बात को समझना जरूरी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से धैर्यपूर्वक युवाओं को सुनने और उनकी सोच, समस्याओं तथा अपेक्षाओं को समझने की सलाह दी है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, युवाओं के साथ बातचीत में करीब 80 प्रतिशत समय उनकी बात सुनने और 20 प्रतिशत समय अपनी बात रखने पर दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे युवाओं के विचारों और असंतोष को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। नायब सैनी ने कार्यकर्ताओं को यह भी संकेत दिया है कि यदि कोई युवा सरकार या भाजपा की नीतियों से असहमत है तो तुरंत उसकी राय को गलत साबित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। पहले उसकी बात पूरी तरह सुनकर उसके बाद तथ्यों और तर्क के आधार पर सकारात्मक बातचीत की जानी चाहिए।
यह रणनीति ऐसे समय में सामने आई है जब Gen-Z की राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता लगातार बढ़ रही है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण युवा किसी भी मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया तेजी से सार्वजनिक कर सकते हैं और उसे बड़े स्तर तक पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। मुख्यमंत्री का जोर अब केवल सोशल मीडिया के जरिए युवाओं तक पहुंचने पर नहीं, बल्कि जमीन पर व्यक्तिगत संवाद बढ़ाने पर भी है। भाजपा कार्यकर्ताओं को युवाओं के घरों तक जाकर उनसे सहज माहौल में बातचीत करने की सलाह दी गई है। इस संपर्क का उद्देश्य केवल राजनीतिक प्रचार करना नहीं होगा। कार्यकर्ताओं को युवाओं से रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, तकनीक, खेल, करियर और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर उनकी राय जानने के लिए कहा गया है। नायब सैनी की रणनीति में युवाओं को केवल मतदाता या राजनीतिक समर्थक के तौर पर देखने के बजाय उन्हें संवाद के महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में जोड़ने पर जोर है। पार्टी का मानना है कि युवाओं की प्राथमिकताओं को समझे बिना उनके साथ लंबे समय का जुड़ाव कायम करना मुश्किल हो सकता है।
जंतर-मंतर और देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं एवं छात्रों से जुड़े प्रदर्शनों ने भी इस चर्चा को बढ़ाया है। इसी संदर्भ में कुछ फिल्मी हस्तियों और सार्वजनिक चेहरों ने छात्रों से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखी थी। अभिनेत्री दीया मिर्जा ने भी छात्रों की जवाबदेही, पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांगों के समर्थन में सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी थी। अभिनेता सिद्धार्थ ने भी छात्रों की परेशानियों को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने परीक्षा पेपर लीक जैसी घटनाओं को गंभीर समस्या बताते हुए छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ने वाले असर की बात कही थी। उन्होंने सार्वजनिक हस्तियों को अपनी व्यक्तिगत राय रखने के अधिकार का भी समर्थन किया था। हरियाणा भाजपा की नई प्रदेश टीम को भी नायब सैनी इस युवा संवाद अभियान की ताकत मान रहे हैं। पार्टी के अपेक्षाकृत युवा पदाधिकारियों के जरिए Gen-Z की भाषा, सोच और संवाद के बदलते तौर-तरीकों को समझने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने शिक्षाविदों, चिकित्सकों, वकीलों, व्यापारियों और अन्य सामाजिक एवं पेशेवर वर्गों से जुड़े भाजपा कार्यकर्ताओं को भी युवा संवाद से जोड़ने पर जोर दिया है। इन लोगों से अपने सामाजिक संपर्कों के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने और उनकी समस्याओं को संगठन तक पहुंचाने की अपेक्षा की जा रही है। नायब सैनी की रणनीति में सोशल मीडिया और जमीनी संवाद को साथ लेकर चलने की कोशिश दिखाई दे रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहने के साथ-साथ आमने-सामने की बातचीत बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री का मानना है कि सोशल मीडिया पर बहस के मुकाबले व्यक्तिगत बातचीत ज्यादा प्रभावी हो सकती है। आमने-सामने संवाद में युवा अपनी बात ज्यादा सहजता से रख सकता है और कार्यकर्ता भी उसकी सोच को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
राजनीतिक नजरिए से देखें तो Gen-Z आने वाले समय में हरियाणा की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ग बन सकता है। रोजगार, शिक्षा, करियर, तकनीक, उद्यमिता, पारदर्शिता और बेहतर अवसर जैसे मुद्दे नई पीढ़ी की प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसीलिए नायब सैनी का जोर युवाओं को केवल चुनावी नजरिए से जोड़ने के बजाय उनके साथ दीर्घकालीन संबंध बनाने पर दिखाई दे रहा है। पार्टी संगठन इस मॉडल को बूथ स्तर तक ले जाने की तैयारी कर रहा है, जहां कार्यकर्ता युवाओं से नियमित संपर्क और संवाद स्थापित करेंगे। अगर यह रणनीति आगे भी जारी रहती है तो हरियाणा भाजपा के लिए युवा संवाद केवल किसी एक घटनाक्रम के बाद उठाया गया कदम नहीं, बल्कि संगठन की स्थायी रणनीति का हिस्सा बन सकता है। इसका लक्ष्य युवाओं की बात सुनना, उनकी चिंताओं को समझना और असहमति को टकराव के बजाय लोकतांत्रिक संवाद में बदलना होगा।




