हरियाणा

भ्रष्टाचार पर हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, दोषी अफसरों पर सख्त कार्रवाई


हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और सख्त करते हुए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया है कि रिश्वतखोरी या भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए गए अधिकारी और कर्मचारियों को उसी जिले और उसी पद पर दोबारा तैनात नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और किसी भी दोषी को किसी प्रकार की राहत नहीं दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि प्रशासन में पारदर्शिता और जनता का भरोसा कायम रखना है। उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी भ्रष्टाचार में संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी और उसे उसी जिले में दोबारा जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी । हाल ही में हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि भ्रष्टाचार के मामलों में पकड़े गए अधिकारियों और कर्मचारियों की उसी जिले में दोबारा तैनाती पर रोक लगाई जाए। सरकार ने इस सुझाव को गंभीरता से लेते हुए नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है, ताकि भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने प्रदेशभर में ऐसे करीब 140 अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान की है जिनके खिलाफ लगातार रिश्वत लेकर काम करने की शिकायतें मिली थीं। इन सभी की सूची तैयार की गई है और उनके मामलों की निगरानी की जा रही है। ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2022 से जून 2026 के बीच 92 ट्रैप और रेड की कार्रवाई की गई, जिनमें कई अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता बढ़ाने और आम नागरिकों को बिना रिश्वत के सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। सरकार चाहती है कि जनता का विश्वास सरकारी व्यवस्था पर और मजबूत हो। प्रेसवार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी ने कांग्रेस शासन का दौर नहीं देखा है। उस समय भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी थी, पेपर लीक जैसी घटनाएं आम थीं और युवाओं की शिकायतों पर समय पर सुनवाई नहीं होती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के लिए युवाओं को बसों की छतों पर बैठकर सफर करना पड़ता था और उनकी सुरक्षा की कोई चिंता नहीं की जाती थी। सीएम सैनी ने कहा कि कांग्रेस ने वर्षों तक केवल वोट बैंक की राजनीति की और गरीब, पिछड़े तथा अनुसूचित जाति के नाम पर राजनीतिक लाभ उठाने का काम किया। उन्होंने यह भी कहा कि जो नेता कठिन समय में पार्टी के साथ खड़े रहे, उन्हें भी बाद में नजरअंदाज किया गया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मौजूदा सरकार सुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है तथा भविष्य में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा।




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