उत्तराखंड

गंगोत्री हाईवे पर फिर भू-धंसाव, ग्रामीण बोले- अस्थायी मरम्मत नहीं चाहिए स्थायी समाधान

उत्तरकाशी:- उत्तरकाशी के भटवाड़ी क्षेत्र में पापड़गाड़ के पास गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक बार फिर भू-धंसाव की घटना सामने आई है। सोमवार सुबह सड़क पर करीब 50 मीटर लंबी दरार दिखाई देने के बाद देखते ही देखते यह चौड़ी होने लगी। हालात बिगड़ने पर हाईवे पर करीब चार घंटे तक वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। स्थिति को देखते हुए प्रशासन और सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीम मौके पर पहुंची। एहतियात के तौर पर कुछ समय तक केवल दोपहिया वाहनों को ही गुजरने की अनुमति दी गई। इसके बाद सड़क पर आई दरारों में मिट्टी भरकर यातायात को दोबारा शुरू कराया गया। हालांकि, स्थानीय ग्रामीण इसे स्थायी समाधान नहीं मान रहे हैं और उनका कहना है कि क्षेत्र में खतरा अभी भी बना हुआ है।

पिछले साल भी धंस गया था हाईवे का बड़ा हिस्सा

स्थानीय लोगों के मुताबिक पापड़गाड़ क्षेत्र लंबे समय से भू-धंसाव की समस्या से जूझ रहा है। पिछले वर्ष अगस्त में आई आपदा के दौरान इसी इलाके में करीब 100 मीटर लंबा हिस्सा धंस गया था। इसके चलते गंगोत्री हाईवे पर तीन दिनों तक यातायात पूरी तरह बंद रहा था। उस दौरान धराली और हर्षिल क्षेत्र में राहत एवं बचाव अभियान चलाने वाली टीमों और अधिकारियों को भी आवागमन में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि हाईवे बंद होने की स्थिति में इस मार्ग का कोई प्रभावी वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध नहीं है।

भारी बारिश और वाहनों से बढ़ सकता है खतरा

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान पापड़गाड़ से बड़ी मात्रा में मलबा और भारी बोल्डर नीचे की ओर आते हैं। इससे गंगोत्री हाईवे के मोटर पुल के अलावा ऊंचाई पर स्थित क्यार्क गांव पर भी खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक अगर लगातार भारी वाहन इस हिस्से से गुजरते रहे और बारिश का दौर तेज हुआ तो सड़क का बड़ा हिस्सा दोबारा धंस सकता है। इसका सीधा असर गंगोत्री धाम की यात्रा और स्थानीय लोगों की आवाजाही पर पड़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल दरारों को मिट्टी से भरने जैसे अस्थायी उपायों के बजाय स्थायी सुरक्षा कार्य कराए जाएं। उनका कहना है कि भागीरथी नदी के किनारे मजबूत सुरक्षात्मक इंतजाम किए जाने की जरूरत है, ताकि भू-धंसाव की समस्या को नियंत्रित किया जा सके।

एक साल बाद भी स्थायी समाधान का इंतजार

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल की घटना को एक वर्ष बीतने के बावजूद इलाके में स्थायी सुरक्षा उपाय पूरी तरह लागू नहीं हो सके हैं। बरसात आते ही लोगों की चिंता बढ़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में हाईवे के साथ-साथ क्यार्क गांव को भी बड़ा नुकसान हो सकता है।

BRO करा रहा विस्तृत सर्वे

प्रशासन की ओर से बताया गया है कि पापड़गाड़ क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने के लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा THDC के माध्यम से विस्तृत सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार की जा रही है।जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के मुताबिक DPR तैयार होने के बाद आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त कर सुरक्षा संबंधी कार्य शुरू कराए जाएंगे। इन कार्यों का उद्देश्य गंगोत्री हाईवे के साथ-साथ क्यार्क गांव को भी संभावित खतरे से सुरक्षित करना है। फिलहाल प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी है। संबंधित विभागों को अलर्ट रहने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। सोमवार की घटना के बाद एक बार फिर साफ हो गया है कि पापड़गाड़ क्षेत्र में बरसात के दौरान भू-धंसाव का खतरा गंभीर बना हुआ है।

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