उत्तराखंड

कैप्टन अजय पंत की कानूनी मुश्किलें बरकरार, ब्रिटिश कोर्ट के फैसले से परिवार की चिंता बढ़ी

उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के रामनगर निवासी कैप्टन अजय पंत की कानूनी मुश्किलें फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही हैं। ब्रिटेन की अदालत ने उनकी जमानत याचिका दूसरी बार भी खारिज कर दी है। इसके साथ ही अब उन्हें अगले निर्धारित न्यायिक चरण तक जेल में ही रहना होगा। मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर 2026 को प्रस्तावित है। इस फैसले के बाद कैप्टन अजय पंत के परिवार की चिंता और बढ़ गई है। भारत में उनके परिजन लगातार सरकार से कूटनीतिक और कानूनी स्तर पर हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 4 जून 2026 को तेल टैंकर एमवी स्माइर्टोस (MV Smyrtos) रूस के उस्त-लूगा टर्मिनल से लगभग 1.01 लाख टन कच्चा तेल लेकर गुजरात के सिक्का बंदरगाह के लिए रवाना हुआ था। जहाज की कमान भारतीय कप्तान अजय पंत के हाथों में थी। बताया जाता है कि जहाज का स्वामित्व हांगकांग स्थित एक कंपनी के पास था, जबकि उसका परिचालन भारत की एक समुद्री प्रबंधन कंपनी के माध्यम से किया जा रहा था।

जहाज की रजिस्ट्री हटने के बाद बढ़ा विवाद

रिपोर्टों के अनुसार, यात्रा के दौरान जहाज की स्थिति उस समय विवादों में आ गई जब अफ्रीकी देश कैमरून ने जहाज की रजिस्ट्री समाप्त कर दी। इसके बाद जहाज तकनीकी रूप से ‘स्टेटलेस’ (Stateless Vessel) यानी बिना किसी राष्ट्रीय ध्वज के समुद्री क्षेत्र में संचालित होने लगा। यही स्थिति आगे चलकर कानूनी विवाद का प्रमुख कारण बनी।

ब्रिटेन की कार्रवाई और गिरफ्तारी

बताया जाता है कि 14 जून 2026 को ब्रिटिश अधिकारियों ने एक संयुक्त अभियान चलाते हुए जहाज को अपने नियंत्रण में लिया। इसके बाद जहाज के कप्तान अजय पंत को गिरफ्तार कर लिया गया। जहाज पर मौजूद अन्य भारतीय और विदेशी चालक दल के सदस्यों को अलग सुरक्षा में रखा गया, जबकि कैप्टन अजय पंत के खिलाफ प्रतिबंधित रूसी तेल के परिवहन से जुड़े आरोपों के आधार पर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

जमानत पर फिर नहीं मिली राहत

हालिया सुनवाई के दौरान कैप्टन अजय पंत की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि वे जहाज के मालिक नहीं, बल्कि केवल एक पेशेवर कप्तान हैं और कंपनी के निर्देशों के अनुसार अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। वहीं अभियोजन पक्ष ने अदालत में आशंका जताई कि यदि जमानत दी गई तो उनके फरार होने की संभावना हो सकती है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल जमानत देने से इनकार कर दिया। अब मामले की अगली सुनवाई और संभावित जूरी ट्रायल 15 दिसंबर 2026 को प्रस्तावित है।

परिवार ने सरकार से लगाई गुहार

कैप्टन अजय पंत की पत्नी रितु पंत ने भारत सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री तथा उत्तराखंड सरकार से अपने पति को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास करने का अनुरोध किया है। परिवार का कहना है कि कैप्टन अजय एक पेशेवर मर्चेंट नेवी अधिकारी हैं और उन्होंने केवल अपने आधिकारिक दायित्वों का निर्वहन किया था।

भारत सरकार की नजर मामले पर

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत सरकार इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय ने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग को आवश्यक कांसुलर और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित अधिकारियों के माध्यम से ब्रिटिश प्रशासन के साथ संपर्क बनाए रखा गया है। अब सभी की निगाहें दिसंबर में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित अंतरराष्ट्रीय मामले में आगे की कानूनी दिशा तय होगी।

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