पंजाब

पंजाब निकाय चुनावों पर हाईकोर्ट की रोक 18 मार्च तक बढ़ी, वार्ड परिसीमन विवाद पर जारी सुनवाई

पंजाब में नगर निकाय चुनावों को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य के 9 नगर निगमों और करीब 100 नगर परिषदों एवं नगर पंचायतों के चुनावी प्रक्रिया पर लगी अंतरिम रोक को 18 मार्च तक बढ़ा दिया है। इससे राज्य सरकार फिलहाल चुनाव प्रक्रिया में कोई जल्दबाजी वाला कदम नहीं उठा सकेगी।

यह फैसला उन कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया, जिनमें वार्ड परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। मामले में हाईकोर्ट के विस्तृत आदेश का इंतजार किया जा रहा है।

वार्ड परिसीमन को लेकर उठे सवाल

सबसे पहले अबोहर, फाजिल्का और पठानकोट से वार्ड परिसीमन को चुनौती देने वाली याचिकाएं दायर की गई थीं। बाद में पंजाब के कई अन्य जिलों से भी इसी तरह की याचिकाएं हाईकोर्ट में पहुंचीं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 31 दिसंबर के बाद वार्ड परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करना या उसमें बदलाव करना केंद्र सरकार के निर्देशों के खिलाफ है। उनका तर्क है कि केंद्र सरकार ने अगस्त 2025 में पूरे देश के लिए एक अधिसूचना जारी की थी, जिसके अनुसार जनगणना 2027 की तैयारियों को देखते हुए शहरों, जिलों और वार्डों की सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।

फिलहाल चुनाव प्रक्रिया पर रोक

इस महीने की शुरुआत में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह चुनाव प्रक्रिया में कोई “जल्दबाजी वाला कदम (Precipitate Action)” न उठाए। इसका सीधा मतलब यह है कि जब तक अदालत अगला फैसला नहीं सुनाती, तब तक निकाय चुनाव की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी।

फरवरी-मार्च में चुनाव की थी संभावना

इससे पहले संभावना जताई जा रही थी कि पंजाब में नगर निकाय चुनाव फरवरी या मार्च के दौरान कराए जा सकते हैं। हालांकि हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद चुनाव कार्यक्रम पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

18 मार्च को होगी अगली सुनवाई

अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी। सभी की नजरें हाईकोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि उसी के आधार पर पंजाब में नगर निकाय चुनाव की आगे की प्रक्रिया तय होगी।

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